खराब एयर क्वालिटी बनी चिंता का कारण
जनता की नाराजगी पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने सवाल उठाया कि लोग इस कदम से इतने परेशान क्यों हैं, जबकि ओडिशा में एयर क्वालिटी इंडेक्स पहले से ही खराब स्थिति में है। उनका कहना था कि प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है और ऐसे में सरकार के पास सख्त फैसले लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
जुर्माने को लेकर उठे सवाल, सरकार ने दिए संकेत
मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि जुर्माने की राशि और नियमों के क्रियान्वयन को लेकर कुछ आपत्तियां सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि जनता का कहना है कि जुर्माना ज्यादा है और इस पर सरकार विचार करेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि नियम 1 फरवरी से लागू जरूर होगा और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
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दिल्ली में पहले से लागू हैं ऐसे कड़े नियम
ओडिशा का यह फैसला देश की राजधानी दिल्ली में लागू सख्त प्रदूषण नियंत्रण उपायों से मिलता-जुलता है। दिल्ली में पहले ही बिना वैध पीयूसी सर्टिफिकेट वाले वाहनों को ईंधन न देने का नियम लागू किया जा चुका है। जिसे आपातकालीन प्रदूषण नियंत्रण उपायों का हिस्सा माना जाता है।
दिल्ली सरकार की सख्त निगरानी और कानूनी आधार
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने हाल ही में खुद पेट्रोल पंपों का निरीक्षण कर इन नियमों के पालन की जांच की थी। दिल्ली सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत आदेश जारी कर यह अनिवार्य किया है कि केवल वैध पीयूसी सर्टिफिकेट वाले वाहनों को ही ईंधन दिया जाए।
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बीएस-मानकों और ग्रैप नियमों का सख्त पालन
दिल्ली में जारी अधिसूचना के मुताबिक, केवल बीएस-VI मानकों के अनुरूप और दिल्ली में पंजीकृत वाहनों को ही शहर में प्रवेश की अनुमति है। इसके अलावा, ग्रेप स्टेज-IV (गंभीर से भी ज्यादा) प्रदूषण की स्थिति में निर्माण सामग्री ले जाने वाले ट्रकों की एंट्री पर भी रोक लगाई जाती है।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से जुड़ा मामला
ये सभी कदम भारत के सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश के अनुरूप हैं, जिसमें एनसीआर क्षेत्र में बीएस-IV मानकों को पूरा न करने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अनुमति दी गई थी। सरकारों का मानना है कि ऐसे उपायों के बिना बढ़ते प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है।
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