केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को कहा कि अगर अमेरिका की ईवी निर्माता कंपनी Tesla (टेस्ला) भारत में अपने इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्माण करती है तो कंपनी को भी इसका फायदा मिलेगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को कहा कि अगर अमेरिका की ईवी निर्माता कंपनी Tesla (टेस्ला) भारत में अपने इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्माण करती है तो कंपनी को भी इसका फायदा मिलेगा।
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नई दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब देश में सभी इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत पेट्रोल वाहनों की कीमत से कम होगी।
उन्होंने कहा, "अगर टेस्ला इंडिया में इलेक्ट्रिक कार मैन्युफैक्चरिंग करेगी तो उनका भी फायदा होगा।"
इससे पहले 26 अप्रैल को, गडकरी ने कहा था, अगर टेस्ला भारत में अपने ईवी का निर्माण करने के लिए तैयार है तो 'कोई समस्या नहीं' है, लेकिन कंपनी को चीन से कारों का आयात नहीं करना चाहिए।
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उन्होंने रायसीना डायलॉग के एक बातचीत सत्र में कहा था, "अगर एलन मस्क (टेस्ला के सीईओ) भारत में निर्माण के लिए तैयार हैं तो कोई समस्या नहीं है... भारत आओ, निर्माण शुरू करो, भारत एक बड़ा बाजार है, वे भारत से निर्यात कर सकते हैं।"
पिछले साल, भारी उद्योग मंत्रालय ने भी टेस्ला को टैक्स पर किसी भी रियायत पर विचार करने से पहले भारत में अपने प्रतिष्ठित इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्माण शुरू करने के लिए कहा था।
2021 Tesla Model 3
- फोटो : Tesla
इस समय, पूरी तरह से निर्मित इकाइयों (सीबीयू) के रूप में आयात की जाने वाली कारों पर इंजन आकार और लागत, बीमा और माल ढुलाई (सीआईएफ) मूल्य 40,000 अमरीकी डालर से कम या ज्यादा के आधार पर 60 से 100 प्रतिशत तक कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) लगता है।
पिछले साल, सड़क मंत्रालय को लिखे एक पत्र में, अमेरिकी फर्म टेस्ला ने कहा था कि 40,000 अमरीकी डालर से ज्यादा के सीमा शुल्क वाले वाहनों पर 110 प्रतिशत का प्रभावी आयात शुल्क शून्य-उत्सर्जन वाहनों के लिए "निषेधात्मक" है।
एलन मस्क, सीईओ टेस्ला कंपनी
- फोटो : For Reference Only
टेस्ला ने सरकार से अनुरोध किया था कि सीमा शुल्क मूल्य चाहे कुछ भी हो, लेकिन इलेक्ट्रिक कारों पर टैरिफ को 40 प्रतिशत तक मानकीकृत किया जाए, और इलेक्ट्रिक कारों पर 10 प्रतिशत का सामाजिक कल्याण अधिभार वापस लिया जाए।
इसने कहा था कि इन बदलावों से भारतीय ईवी इको सिस्टम के विकास को बढ़ावा मिलेगा और कंपनी बिक्री, सर्विस और चार्जिंग बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष निवेश करेगी। और अपने वैश्विक संचालन के लिए भारत से खरीद में अहम बढ़ोतरी करेगी।
कंपनी ने तर्क दिया था कि इन प्रस्तावों का भारतीय ऑटोमोटिव बाजार पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि कोई भी भारतीय मूल उपकरण निर्माता मौजूद समय में 40,000 अमरीकी डालर (लगभग 30.6 लाख रुपये) से ज्यादा की एक्स-फैक्टरी कीमत वाली कार (ईवी या इंटरनल कंब्शन इंजन) का उत्पादन नहीं करता है। और भारत में बेची जाने वाली कारों (ईवी या आईसीई) में से सिर्फ 1 से 2 प्रतिशत की एक्स-फैक्टरी/सीमा शुल्क कीमत 40,000 अमरीकी डॉलर से ज्यादा है।