MCD से गडकरी ने क्या सवाल पूछा?
दिल्ली में एक कार्यक्रम में बात करते हुए गडकरी ने कहा कि उन्होंने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के साथ हुई एक बैठक में सीधे सवाल किया, "आप ग्रीन एक्टिविटीज के लिए क्या योगदान दे रहे हैं?"
उनके अनुसार, जवाब मिला- कोई योगदान नहीं।
इसके बाद उन्होंने पूछा, "अगर कोई पर्यावरणीय काम नहीं हो रहा, तो यह टोल क्यों वसूला जा रहा है?"
गडकरी ने दिल्ली सरकार से क्या मांग की?
गडकरी ने कहा कि एमसीडी ने उन्हें बताया कि यह ग्रीन टैक्स निगम के लिए आर्थिक रूप से अहम है। इस पर उन्होंने सुझाव दिया कि
दिल्ली सरकार एमसीडी को 800-900 करोड़ रुपये की ग्रांट दे सकती है, ताकि आम लोगों पर यह अतिरिक्त बोझ न डाला जाए और ईसीसी को खत्म किया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री से इस शुल्क को तुरंत बंद करने का अनुरोध किया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला क्यों दिया जा रहा है?
गडकरी के अनुसार, अधिकारियों ने ईसीसी जारी रखने के पीछे सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का हवाला दिया। इस पर उन्होंने कहा कि उन्होंने आग्रह किया है कि
अदालत से दोबारा इस फैसले पर विचार कराया जाए, ताकि इस टैक्स से परेशान लोगों को राहत मिल सके।
ECC के पैसों के इस्तेमाल पर क्या सवाल उठ रहे हैं?
गडकरी ने बताया कि जब उनके मंत्रालय ने ईसीसी से जुटाए गए फंड की जांच की, तो पाया गया कि
यह पैसा वायु गुणवत्ता सुधारने के मूल उद्देश्य में इस्तेमाल नहीं किया गया।यही वजह है कि उन्होंने इस टैक्स की प्रासंगिकता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
नई बहस छिड़ी?
ग्रीन टैक्स के नाम पर वसूले जा रहे ईसीसी को लेकर अब यह सवाल फिर से जोर पकड़ रहा है कि
नितिन गडकरी के बयान ने दिल्ली में ग्रीन टैक्स की उपयोगिता और जवाबदेही पर नई बहस छेड़ दी है।