केवल ₹5,000 की यह रेट्रोफिट डिवाइस गाड़ियों के प्रदूषण को कितना कम करेगी?
इस 'रेट्रोफिट एमिशन-कंट्रोल डिवाइस' (RECD) को पुराने और अत्यधिक धुआं छोड़ने वाले कमर्शियल वाहनों पर फिट करने के लिए डिजाइन किया गया है:
- प्रदूषण में भारी कटौती: नितिन गडकरी के अनुसार, यह डिवाइस हवा में मिलने वाले खतरनाक पार्टिकुलेट मैटर (PM) के उत्सर्जन को 90 प्रतिशत तक और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) के उत्सर्जन को 60 प्रतिशत तक कम कर सकती है।
- सस्ता और प्रभावी विकल्प: बिना नया वाहन खरीदे या पूरा इंजन बदले, इस छोटी सी डिवाइस के जरिए पुराने डीजल वाहन BS-VI जैसे सख्त पर्यावरण मानकों का अनुपालन कर सकेंगे।
- जनरेटर से प्रेरित तकनीक: गडकरी ने स्पष्ट किया कि इसी तरह की तकनीक का उपयोग पहले से ही डीजल जनरेटर के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है। और अब इसे सड़कों पर दौड़ने वाले भारी वाहनों के लिए भी लाया जा रहा है।
क्या यह नई डिवाइस स्क्रैपेज नीति की जगह लेगी?
यह रेट्रोफिट विकल्प सरकार की मौजूदा व्हीकल स्क्रैपेज नीति को खत्म नहीं करेगा, बल्कि उसके साथ मिलकर काम करेगा:
- किफायती समाधान: जिन ट्रकों और बसों की स्क्रैपिंग की समयसीमा अभी पूरी नहीं हुई है। उनके मालिकों को वाहनों को कबाड़ में भेजने के बजाय प्रदूषण घटाने का एक बेहद सस्ता और कानूनी विकल्प मिल जाएगा।
- मानकीकरण के लिए नया नियम: इस उपकरण के व्यावसायिक उपयोग को मानकीकृत करने के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय 'ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड 228' (AIS 228) को अधिसूचित करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत डिवाइस की तकनीकी विशिष्टताएं और प्रदर्शन मानक तय किए जाएंगे।
सार्वजनिक परिवहन और बसों की कमी को लेकर केंद्रीय मंत्री ने क्या चिंता जताई?
कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने देश में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली और बसों की भारी किल्लत की तरफ ध्यान आकर्षित किया:
- प्रति हजार व्यक्ति बसों का अनुपात: वैश्विक मानक के अनुसार प्रति 1,000 लोगों पर 8 बसें होनी चाहिए। जबकि भारत में यह आंकड़ा महज 2 बस प्रति 1,000 व्यक्ति है।
- छोटे शहरों के लिए नए मॉडल्स: उन्होंने छोटे और मध्यम शहरों में सार्वजनिक परिवहन के नए और इनोवेटिव मॉडल्स लागू करने का आह्वान किया। क्योंकि ऐसे शहरों में भारी-भरकम बजट वाली मेट्रो रेल परियोजनाएं व्यावहारिक रूप से काफी खर्चीली साबित होती हैं।