टोल वसूली और एनएचएआई की आमदनी
वित्त वर्ष 2024-25 में टोल एजेंसियों ने कुल 28,823 करोड़ रुपये वसूले, जिनमें से 26,149 करोड़ रुपये एनएचएआई को भेजे गए। इसके मुकाबले 2023-24 में कुल वसूली 27,417 करोड़ रुपये थी, जिनमें से एनएचएआई को 22,681 करोड़ रुपये ही मिले थे।
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कैसे हुई इतनी बड़ी बचत
अधिकारियों ने बताया कि ये बचत एनएचएआई द्वारा किए गए प्रशासनिक और अनुबंध सुधारों की वजह से हुई है। एनएचएआई ने कॉन्ट्रैक्ट की सख्त मॉनिटरिंग शुरू की, पहले की "तीन महीने की ऑटो एक्सटेंशन" नीति खत्म की। और अब ज्यादातर कॉन्ट्रैक्ट एक साल की अवधि के लिए दिए जा रहे हैं। इससे टेंडर प्रक्रिया समय पर पूरी हो रही है और पारदर्शिता भी बढ़ी है।
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कॉन्ट्रैक्टरों के लिए नई गाइडलाइंस
एनएचएआई ने अल्पकालिक कॉन्ट्रैक्ट्स को कम किया है और ठेकेदारों द्वारा बार-बार समय से पहले कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगाई है। अब एक वित्त वर्ष में किसी ठेकेदार को अधिकतम तीन बार ही ऐसी अनुमति दी जा सकती है।
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बोली प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा
टोल ऑपरेटर्स का भरोसा बनाए रखने के लिए एनएचएआई लगातार ऑल इंडिया यूजर फी कलेक्शन फेडरेशन के साथ संवाद कर रही है। इसके तहत बैंक गारंटी और परफॉर्मेंस सिक्योरिटी समय पर जारी की जा रही हैं, जिससे टेंडर प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।
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