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डिलीवरी के वक्त ही खराब निकला नई टाटा कर्व ईवी का चार्जिंग पोर्ट: उपभोक्ता आयोग का आदेश- मिलेंगे 1.1 लाख रुपये

Thu, 15 Oct 2026 11:43 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Tata Curvv EV खरीदने के बाद चार्जिंग पोर्ट में खराबी का सामना करने वाले ग्राहक को हैदराबाद के जिला उपभोक्ता आयोग से राहत मिली है। आयोग ने टाटा मोटर्स और उसके डीलर को खराब पुर्जे बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के बदलने और ग्राहक को कुल ₹1.1 लाख देने का आदेश दिया है।
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Consumer Commission on Tata Curvv EV - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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हैदराबाद की एक उपभोक्ता आयोग ने नई Tata Curvv EV (टाटा कर्व ईवी) खरीदने वाले ग्राहक के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने पाया कि गाड़ी की डिलीवरी के वक्त ही उसका चार्जिंग पोर्ट खराब था। इसे 'सेवा में कमी' मानते हुए आयोग ने टाटा मोटर्स और उसके अधिकृत डीलर को निर्देश दिया है कि वे गाड़ी के खराब हिस्सों को मुफ्त में बदलें और ग्राहक को 1.1 लाख रुपये का मुआवजा दें।
  • फैसले की तारीख: डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रैसल कमीशन-III, हैदराबाद ने 29 सितंबर 2026 को यह आदेश जारी करते हुए दोनों कंपनियों को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया है।

 

खरीदार को डिलीवरी के समय किस परेशानी का सामना करना पड़ा था?

शिकायत के मुताबिक, एम आर लैबोरेटरीज प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी ने 28 दिसंबर 2024 को 'ऑरेंज ऑटो' डीलरशिप से नई टाटा कर्व ईवी बुक की थी। और बैंक ऑफ बड़ौदा से लोन लेकर बाकी भुगतान पूरा किया था। 
  • डिलीवरी में देरी और जल्दबाजी: जब 24 जनवरी 2025 को गाड़ी की डिलीवरी लेने की बारी आई, तो डीलर ने शोरूम पर किसी अंतिम संस्कार के बाद होने वाले अनुष्ठान का हवाला देकर डिलीवरी टालनी चाही और ग्राहक को जल्दबाजी में सिर्फ एक डेमो दिखाने के लिए मजबूर किया।
  • खराब चार्जिंग पोर्ट: उसी डेमो के दौरान पता चला कि गाड़ी का चार्जिंग पोर्ट काम नहीं कर रहा था। डीलर ने अगले दिन इसे ठीक करने का वादा किया, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
  • सर्विस सेंटर के चक्कर: इसके बाद गाड़ी को ऐसे सर्विस सेंटरों पर घुमाया गया जहां ट्रेंड स्टाफ और सही उपकरण नहीं थे। 4 फरवरी से 15 फरवरी 2025 तक गाड़ी वर्कशॉप में ही खड़ी रही, और कभी टूटी हुई लैच, कभी अटके हुए तार तो कभी मोटर जलने जैसी अलग-अलग वजहें बताई गईं। तंग आकर ग्राहक ने कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और पूरी गाड़ी बदलने या 23.13 लाख रुपये रिफंड करने की मांग की। 

 

डीलर और टाटा मोटर्स ने कोर्ट में क्या दलीलें दीं?

  • डीलर का रुख: अधिकृत डीलर 'ऑरेंज ऑटो' की तरफ से कोई भी लिखित जवाब तय समयसीमा के भीतर कोर्ट में पेश नहीं किया गया, जिसके चलते कोर्ट ने उनका पक्ष रखने का अधिकार समाप्त कर दिया।
  • टाटा मोटर्स का पक्ष: निर्माता कंपनी ने दलील दी कि खरीदार (कंपनी) ने इसे व्यावसायिक उद्देश्य के लिए खरीदा था, इसलिए वे 'कंस्यूमर' (उपभोक्ता) की परिभाषा में नहीं आते। कंपनी ने यह भी कहा कि बिक्री, डिलीवरी और सर्विस का काम डीलर संभालता है, इसलिए इसमें कंपनी की कोई सीधी भूमिका नहीं है। और एक्सपर्ट एविडेंस के बिना मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट साबित नहीं होता।

 

उपभोक्ता आयोग की जांच और निष्कर्ष में क्या सामने आया?

बेंच (अध्यक्ष एम. रामगोपाल रेड्डी और सदस्य जे. श्यामला व डी. श्रीदेवी) ने सभी पक्षों को सुनने के बाद ये टिप्पणियां कीं:
  • उपभोक्ता की श्रेणी: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टाटा मोटर्स यह साबित करने में विफल रही कि गाड़ी का इस्तेमाल कमर्शियल ट्रांसपोर्ट या मुनाफा कमाने वाले फ्लीट के लिए किया जा रहा था। इसलिए खरीदार एक वैध उपभोक्ता है।
  • चार्जिंग पोर्ट का महत्व: आयोग ने कहा कि चार्जिंग पोर्ट किसी भी इलेक्ट्रिक वाहन की 'लाइफलाइन' है और डिलीवरी के वक्त ही उसका खराब होना गंभीर लापरवाही है।
  • निर्णय: चूंकि किसी स्वतंत्र अधिकृत लैब की रिपोर्ट से पूरी गाड़ी में बड़ा 'मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट' साबित नहीं हुआ। इसलिए कोर्ट ने पूरी गाड़ी बदलने या रिफंड देने की मांग ठुकरा दी। हालांकि, लगातार रिपेयर और मानसिक परेशानी के लिए निर्माता और डीलर दोनों को जिम्मेदार माना।

 

कोर्ट का अंतिम फैसला और निर्देश क्या हैं?

हैदराबाद उपभोक्ता आयोग ने अपनी शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए टाटा मोटर्स और ऑरेंज ऑटो को निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:
  1. टाटा Curvv EV के दोषपूर्ण हिस्सों को बिल्कुल मुफ्त में बदला जाए।
  2. मानसिक उत्पीड़न और पीड़ा के लिए 1,00,000 रुपये का मुआवजा दिया जाए।
  3. मुकदमे के खर्च के रूप में 10,000 रुपये का भुगतान किया जाए।
कंपनियों को यह निर्देश दिया गया है कि वे आदेश की कॉपी मिलने के 45 दिनों के भीतर इन सभी निर्देशों का पालन करें। 
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