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Mumbai-Pune Expressway Missing Link: इस 'मिसिंग लिंक' का वाहन चालकों के लिए क्या मायने हैं? जानें जरूरी बातें

Sat, 02 May 2026 03:42 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के कनेक्टिंग लिंक का मुंबई की ओर जाने वाला रास्ता शनिवार दोपहर (2 मई, 2026) को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया। जानें मोटर वाहन चालकों के लिए इसके क्या मायने हैं।
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Mumbai-Pune Expressway Missing Link - फोटो : PTI
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विस्तार
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मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर लंबे समय से प्रतीक्षित 'मिसिंग लिंक' (Missing Link) का आखिरकार उद्घाटन कर दिया गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस परियोजना को हरी झंडी दिखाई, जिसे महाराष्ट्र दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार, 2 मई से आम जनता के लिए खोल दिया गया है। यह प्रोजेक्ट भारत के सबसे व्यस्त हाईवे कॉरिडोर में से एक के. सबसे कठिन हिस्से को सुगम बनाएगा। 

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पुणे खंड के चालू होने के एक दिन बाद, उद्घाटन के लिए तैयार किए गए ढांचे को हटाने और साफ-सफाई के काम में हुई देरी के बाद, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के कनेक्टिंग लिंक का मुंबई की ओर जाने वाला रास्ता शनिवार दोपहर (2 मई, 2026) को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया।
 

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के 'मिसिंग लिंक' की आवश्यकता क्यों थी?

वर्षों से इस मार्ग पर स्थित 'बोरघाट' का हिस्सा वाहन चालकों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ था। इसकी मुख्य वजहें ये थीं:

  • रास्ते का संकरा होना और खतरनाक तीखे मोड़।

  • अत्यधिक ढलान और अनिश्चित मौसम।

  • पीक ऑवर्स के दौरान ट्रैफिक में 2 घंटे तक की देरी।

'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट खोपोली और कुसगांव के बीच एक वैकल्पिक रास्ता बनाकर इन चुनौतीपूर्ण हिस्सों को पूरी तरह बाईपास कर देता है।

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इंजीनियरिंग के नजरिए से इस प्रोजेक्ट में क्या खास है?

ड्राइविंग के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए इस प्रोजेक्ट में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है:

  • सुरंग और पुल: इसमें दो चौड़ी सुरंगें और ऊंचे वायडक्ट्स (viaducts) शामिल हैं।

  • टाइगर वैली ब्रिज: टाइगर वैली के ऊपर एक केबल-स्टेयड ब्रिज (cable-stayed bridge) बनाया गया है।

  • सुरक्षा: तीखे मोड़ों को हटाकर और भारी बारिश वाले क्षेत्रों के संपर्क को कम करके सुरक्षा बढ़ाई गई है।

 

वाहन चालकों के लिए 'मिसिंग लिंक' के क्या लाभ हैं?

इस नए कॉरिडोर के शुरू होने से यात्रियों को कई व्यावहारिक फायदे होंगे:

  • दूरी और समय की बचत: यह नया कॉरिडोर लगभग 19 किमी लंबा है, जिससे कुल दूरी 6 किमी कम हो गई है। सामान्य ट्रैफिक में मुंबई और पुणे के बीच यात्रा का समय 20 से 30 मिनट कम हो जाएगा।

  • कम तनावपूर्ण सफर: यात्रियों को अब बोरघाट के ट्रैफिक जाम से जूझना नहीं पड़ेगा, जिससे सफर आरामदायक होगा।

  • ईंधन और वाहन की बचत: घाट सेक्शन में लगने वाले जाम के कारण होने वाली ईंधन की बर्बादी अब नहीं होगी। साथ ही सुचारू रास्तों की वजह से वाहनों में होने वाली टूट-फूट भी कम होगी।

 

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क्या यात्रियों को अतिरिक्त टोल टैक्स देना होगा?

एक बड़े अपग्रेड के बावजूद, अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि:

  • 'मिसिंग लिंक' का उपयोग करने के लिए वाहन चालकों से कोई अतिरिक्त टोल शुल्क नहीं लिया जाएगा।

  • शुरुआती नियम: अगले छह महीनों के शुरुआती चरण में इस रूट पर केवल हल्के मोटर वाहनों (LMV) और बसों को ही अनुमति दी जाएगी। भारी वाहनों को फिलहाल पुराने घाट सेक्शन का ही उपयोग करना होगा।

कुल मिलाकर, 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट ने एक्सप्रेसवे को एक भरोसेमंद और हर मौसम के अनुकूल कॉरिडोर में बदल दिया है। महाराष्ट्र के दो प्रमुख शहरों के बीच अब सफर सुरक्षित, तेज और बिना किसी परेशानी के हो सकेगा।

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