इंजीनियरिंग के नजरिए से इस प्रोजेक्ट में क्या खास है?
ड्राइविंग के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए इस प्रोजेक्ट में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है:
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सुरंग और पुल: इसमें दो चौड़ी सुरंगें और ऊंचे वायडक्ट्स (viaducts) शामिल हैं।
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टाइगर वैली ब्रिज: टाइगर वैली के ऊपर एक केबल-स्टेयड ब्रिज (cable-stayed bridge) बनाया गया है।
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सुरक्षा: तीखे मोड़ों को हटाकर और भारी बारिश वाले क्षेत्रों के संपर्क को कम करके सुरक्षा बढ़ाई गई है।
वाहन चालकों के लिए 'मिसिंग लिंक' के क्या लाभ हैं?
इस नए कॉरिडोर के शुरू होने से यात्रियों को कई व्यावहारिक फायदे होंगे:
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दूरी और समय की बचत: यह नया कॉरिडोर लगभग 19 किमी लंबा है, जिससे कुल दूरी 6 किमी कम हो गई है। सामान्य ट्रैफिक में मुंबई और पुणे के बीच यात्रा का समय 20 से 30 मिनट कम हो जाएगा।
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कम तनावपूर्ण सफर: यात्रियों को अब बोरघाट के ट्रैफिक जाम से जूझना नहीं पड़ेगा, जिससे सफर आरामदायक होगा।
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ईंधन और वाहन की बचत: घाट सेक्शन में लगने वाले जाम के कारण होने वाली ईंधन की बर्बादी अब नहीं होगी। साथ ही सुचारू रास्तों की वजह से वाहनों में होने वाली टूट-फूट भी कम होगी।
क्या यात्रियों को अतिरिक्त टोल टैक्स देना होगा?
एक बड़े अपग्रेड के बावजूद, अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि:
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'मिसिंग लिंक' का उपयोग करने के लिए वाहन चालकों से कोई अतिरिक्त टोल शुल्क नहीं लिया जाएगा।
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शुरुआती नियम: अगले छह महीनों के शुरुआती चरण में इस रूट पर केवल हल्के मोटर वाहनों (LMV) और बसों को ही अनुमति दी जाएगी। भारी वाहनों को फिलहाल पुराने घाट सेक्शन का ही उपयोग करना होगा।
कुल मिलाकर, 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट ने एक्सप्रेसवे को एक भरोसेमंद और हर मौसम के अनुकूल कॉरिडोर में बदल दिया है। महाराष्ट्र के दो प्रमुख शहरों के बीच अब सफर सुरक्षित, तेज और बिना किसी परेशानी के हो सकेगा।