कई डीजल गाड़ियां लाइन-अप से बाहर
कई कंपनियों ने डीजल संस्करणों को अपने लाइन-अप से बाहर करने का फैसला किया है। क्योंकि उन्हें वाहनों को बीएस6 उत्सर्जन मानक में अपग्रेड करने के लिए भारी निवेश की आवश्यकता होगी। जिसके चलते कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी होगी। इससे यह काफी महंगा भी हो जाएगा। इनमें मारुति की सबकॉम्पैक्ट डीजल एसयूवी विटारा ब्रेजा, एंट्री लेवल सब-4मीटर सेडान डिजायर डीजल, रेनो डस्टर डीजल, स्कोडा की ऑक्टेविया डीजल, मारुति स्विफ्ट डीजल, फॉक्सवैगन पोलो डीजल और ऑडी की क्यू 3 और 5 एसयूवी के डीजल वैरिएंट शामिल हैं।
86 डीजल मॉडल्स में से 42 बंद
देश की सबसे बड़े कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के निदेशक शशांक श्रीवास्तव ने कहा कि देश में वर्तमान में बिक रहे 86 डीजल मॉडल्स में से 42 बंद कर दिए जाएंगें। इन 42 मॉडल्स में से 7 मारुति के हैं। कंपनियों को कहना है कि डीजल मॉडल की मार्केट में अब मांग कम हो गई है। साथ ही अब पेट्रोल और डीजल के मूल्यों में भी अंतर कम हुआ है। दूसरी वजह यह भी है कि डीजल कारों की उम्र 10 साल, तो वहीं पेट्रोल कारों की उम्र 15 साल होती है। इस हिसाब से माना जाता है कि पेट्रोल गाड़ियां डीजल इंजन के मुकाबले बेहतर परफॉरमेंस वाली होती हैं। इसलिए ग्राहक पेट्रोल गाड़ियों को ज्यादा पसंद करते हैं।
मारुति सबसे पहली कंपनी
मारुति के चेयरमैन आर सी भार्गव का कहना है कि मारुति देश की सबसे पहली मैन्यूफैक्चरर्स कंपनी थी, जिसने एक साल पहले ही डीजल सेगमेंट को अलविदा कहने करा एलान कर दिया था। उन्होंने कहा कि छोटी कारों में डीजल इंजन को बीएस6 मानकों पर अपग्रेड करने में ज्यादा लागत आती है। साथ ही उन्होंने कहा कि हम अगले साल अप्रैल तक डीजल वाहनों की बिक्री पूरी तरह से बंद कर दी जाएगी।
डीजल से कई कंपनियों ने की तौबा
वहीं इसके बाद रेनो, निसान, फॉक्सवैगन, स्कोडा और ऑडी सभी ने भी एलान किया कि वे अब अपनी कारों के डीजल वैरिएंट नहीं बनाएंगी। रेनो ने अपनी सबसे पॉपुलर कॉम्पैक्ट एसयूवी डस्टर को केवल पेट्रोल में ही अपग्रेड किया है। बाकी कंपनियों का भी कमोबेश यही हाल है। हालांकि ह्यूंदै, किआ मोटर्स, टाटा मोटर्स, महिंद्रा ग्रुप, टोयोटा, फोर्ड और मर्सिडीज बेंज अभी भी भी बीएस6 इंजन के साथ डीजल गाड़ियां बना रही हैं।