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Car EMI: लोन डिफॉल्ट होने पर भी नहीं छीनते आपके अधिकार, जानें कार लोन की किस्त छूटने पर क्या कहता है कानून?

Thu, 25 Jun 2026 09:30 AM IST
Jagriti ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Car Loan EMI Default: क्या कार लोन की EMI बाउंस होते ही बैंक आपकी गाड़ी जब्त कर सकता है? यह सवाल अधिकतर लोगों के मन में होता है। तो आइए इस लेख में जानते हैं कि रिकवरी एजेंट्स क्या कर सकते हैं और क्या नहीं? जानिए RBI के नियम, नोटिस प्रक्रिया और अपने अधिकारों की पूरी जानकारी।
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
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Car Loan Rights: बढ़ती आधुनिकता के साथ आज के समय में कार खरीदना पहले से ज्यादा आसान हो गया है। बैंक और फाइनेंस कंपनियां कुछ दस्तावेजों के आधार पर तुरंत वाहन लोन उपलब्ध करा रही हैं, लेकिन नौकरी जाने, कारोबार में नुकसान या किसी मेडिकल इमरजेंसी जैसी परिस्थितियों में कई बार लोगों के लिए EMI समय पर जमा करना मुश्किल हो जाता है।

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ऐसे में लोगों को सबसे बड़ा डर यह होता है कि कहीं बैंक या रिकवरी एजेंट अचानक आकर गाड़ी न उठा ले जाएं। हालांकि वास्तविकता इससे अलग है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियम लोन लेने वाले ग्राहकों को कई महत्वपूर्ण अधिकार प्रदान करते हैं।

EMI मिस होने पर क्या बैंक तुरंत गाड़ी जब्त कर सकता है?

  • सीधा जवाब है, नहीं...अगर किसी ग्राहक की एक या दो EMI बाकी हैं तो बैंक या फाइनेंस कंपनी तुरंत वाहन जब्त नहीं कर सकती। इसके लिए एक तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।
  • सबसे पहले लेंडर ग्राहक को आधिकारिक डिमांड नोटिस भेजता है, जिसमें बकाया राशि चुकाने के लिए लगभग 60 दिनों का समय दिया जाता है। इस दौरान ग्राहक को भुगतान करने या अपनी स्थिति को बताने का पूरा मौका भी मिलता है।

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वाहन कब्जे में लेने से पहले देना होगा नोटिस

  • अब अगर नोटिस अवधि समाप्त होने के बाद भी बकाया राशि जमा नहीं होती है, तब बैंक वाहन को अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
  • इसके लिए भी बैंक को ग्राहक को एक प्री-पजेशन नोटिस भेजना होता है। इस नोटिस के जरिए ग्राहक को बताया जाता है कि वाहन को कब्जे में लेने की कार्रवाई की जा सकती है।
  • बिना नोटिस और निर्धारित प्रक्रिया अपनाए किसी वाहन को जब्त करना गैर-कानूनी माना जाता है।

मनमानी पर RBI की सख्ती

  • कई बार शिकायतें सामने आती हैं कि रिकवरी एजेंट्स ग्राहकों को डराने या दबाव बनाने की कोशिश करते हैं। तो इसके लिए आरबीआई ने एक स्पष्ट निर्देश जारी किया है।
  • नियमों के अनुसार रिकवरी एजेंट सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद ग्राहक से संपर्क नहीं कर सकते। इसके अलावा वे किसी भी प्रकार की धमकी, गाली-गलौज, बदसलूकी या मानसिक उत्पीड़न नहीं कर सकते।
  • अगर कोई एजेंट आपके घर आता है तो आप उससे उसका पहचान पत्र और बैंक का अधिकृत पत्र मांग सकते हैं। यह आपका अधिकार है।


जबरदस्ती चाबी छीनने की कोशिश हो तो क्या करें?

  • इस दौरान अगर कोई रिकवरी एजेंट जबरदस्ती वाहन की चाबी लेने, वाहन उठाने या डराने-धमकाने का प्रयास करता है तो ग्राहक तुरंत स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकता है।
  • इसके अलावा संबंधित बैंक या फाइनेंस कंपनी के शिकायत निवारण विभाग में भी मामला दर्ज कराया जा सकता है।


गाड़ी जब्त होने के बाद भी खत्म नहीं होते अधिकार

  • कई लोग यह मान लेते हैं कि एक बार वाहन बैंक के कब्जे में चला गया तो उनके सभी अधिकार समाप्त हो जाते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है।
  • वाहन बेचने से पहले बैंक को ग्राहक को प्री-सेल नोटिस भेजना होता है। इसमें बकाया राशि जमा करके वाहन वापस लेने का अंतिम अवसर दिया जाता है।
  • इस दौरान अगर ग्राहक भुगतान कर देता है तो वह अपनी गाड़ी वापस प्राप्त कर सकता है।


नीलामी के बाद बची रकम पर भी ग्राहक का हक

  • इतना ही नहीं, अगर बैंक वाहन की नीलामी करता है तो उसे उचित बाजार मूल्य पर बेचने की कोशिश करनी होती है।
  • नीलामी से प्राप्त राशि का उपयोग पहले बकाया लोन चुकाने में किया जाता है। यदि वाहन की बिक्री से लोन राशि से अधिक पैसा मिलता है तो बची हुई अतिरिक्त रकम ग्राहक को लौटाना बैंक की जिम्मेदारी होती है।
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