इस अवसर पर बोलते हुए मंत्री ने मारुति सुजुकी की "राष्ट्रव्यापी कार्यक्रमों के जरिए सड़क सुरक्षा के लिए अनुकरणीय प्रतिबद्धता" के लिए सराहना की। और कहा कि "उनकी अभिनव पहलों में से एक, स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक (ADTT) यह सुनिश्चित करता है कि सिर्फ कुशल ड्राइवरों को ही लाइसेंस मिले। जिससे हमारी सड़कें सभी के लिए सुरक्षित होंगी"।
उन्होंने कहा, "हमने औरंगाबाद और पटना में ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक को सफलतापूर्वक स्वचालित कर दिया है। और ड्राइवरों को लाइसेंस परीक्षण के लिए बेहतर तरीके से तैयार होते देखा है। हम बिहार में पांच और ADTT विकसित करने के लिए मारुति सुजुकी के साथ फिर से साझेदारी करके खुश हैं। यह सहयोग हमारे राज्य में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और जिम्मेदार ड्राइविंग प्रथाओं को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।"
Maruti Suzuki Automated Driving Licence Test Track
- फोटो : Maruti Suzuki
मारुति सुजुकी के कॉरपोरेट मामलों के कार्यकारी अधिकारी राहुल भारती ने कहा, "बिहार सरकार के साथ हमारा जुड़ाव 2018 से है। जब हमने औरंगाबाद और बाद में पटना में ड्राइवर प्रशिक्षण देने के लिए राज्य का पहला इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च (आईडीटीआर) स्थापित किया था। हम इस सड़क सुरक्षा परियोजना को हमें सौंपने के लिए बिहार सरकार को धन्यवाद देते हैं।"
भारती ने कहा, "केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2014 से 2023 के बीच देश भर में सड़क दुर्घटनाओं में 15.3 लाख लोगों की जान चली गई। भारत में सड़क मृत्यु दर प्रति 10,000 किलोमीटर पर लगभग 250 है। जबकि चीन में यह दर 119, अमेरिका में 57 और ऑस्ट्रेलिया में सिर्फ 11 है।"
उन्होंने कहा, "सड़क सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण पहलू चालक का कौशल और ट्रैफिक नियमों का ज्ञान है। स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक यह सुनिश्चित करेंगे कि लाइसेंस चाहने वाले बेहतर तरीके से तैयार हों और सिर्फ कुशल चालकों को ही लाइसेंस दिया जाए। इससे सकारात्मक बदलाव आएगा, जो मानवीय भूल के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में काफी मददगार साबित होगा।"
मारुति सुजुकी के अधिकारी ने कहा, "बिहार में पूर्णिया, गया, सारण, भागलपुर और दरभंगा में पांच और टेस्ट ट्रैक जुड़ने के साथ ही हम देश भर में 44 ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक का स्वचालन पूरा कर लेंगे।"