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White Paper: बैटरी इकोसिस्टम की दिशा में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़ा कदम, IESA लाएगा ‘विजन 2047’

Tue, 13 Jan 2026 06:59 PM IST
जागृति ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

India Battery Ecosystem: भारत को एनर्जी स्टोरेज टेक्नोलॉजी में वैश्विक नेतृत्व दिलाने की दिशा में इंडिया एनर्जी स्टोरेज अलायंस बड़ा कदम उठाने जा रहा है। इंडस्ट्री बॉडी ने घोषणा की है कि वह विजन 2047 भारत के आत्मनिर्भर बैटरी इकोसिस्टम के लिए रोडमैप नाम से एक अहम व्हाइट पेपर जारी करेगा। जानें इसके बारे में विस्तार से..
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : freepik
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विस्तार
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IESA (इंडिया एनर्जी स्टोरेज अलायंस) के मुताबिक, ये व्हाइट पेपर भारत में एक प्रतिस्पर्धी और इंटीग्रेटेड घरेलू बैटरी वैल्यू चेन तैयार करने का रणनीतिक खाका पेश करेगा। इसका उद्देश्य न सिर्फ भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता को मजबूत करना है, बल्कि देश को बैटरी और एनर्जी स्टोरेज टेक्नोलॉजी में ग्लोबल लीडर के रूप में स्थापित करना भी है।

क्यों जरूरी है राष्ट्रीय बैटरी रणनीति

आईईएसए का कहना है कि भारी उद्योग, बिजली, नवीकरणीय ऊर्जा, खान, वाणिज्य और वित्त मंत्रालयों के प्रयासों के बावजूद भारत को अब एक समग्र राष्ट्रीय बैटरी रणनीति की जरूरत है। यह रणनीति नीतिगत तालमेल, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा और सप्लाई चेन की कमियों को दूर करने में मदद करेगी।

किन-किन चीजों पर फोकस?

इंडिया बैटरी मैन्युफैक्चरिंग एंड सप्लाई चेन काउंसिल (IBMSCC ) और इंडिया रीयूज एंड रिसाइकिल काउंसिल (IRRC ) जैसे काउंसिल्स के इनपुट से तैयार यह व्हाइट पेपर अपस्ट्रीम घटकों, खनिज शोधन, सेल मैन्युफैक्चरिंग से लेकर डाउनस्ट्रीम पैक असेंबली, सिस्टम इंटीग्रेशन और रीसाइक्लिंग तक पूरी वैल्यू चेन के लिए कार्रवाई योग्य सिफारिशें देगा।

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5–6 फरवरी को हैदराबाद में होने वाले IBMSCS 2026 में 600 से ज्यादा प्रतिनिधि, 250 से अधिक कंपनियां और 50 से ज्यादा उद्योग विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। इसमें चीन, जापान, कोरिया, जर्मनी, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और फिनलैंड जैसे देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है, इससे ACC वैल्यू चेन की चुनौतियों पर साझा समाधान निकाले जा सकें।

EV और रिन्यूएबल एनर्जी से बढ़ती मांग

IESA अध्यक्ष देबमाल्य सेन ने कहा कि EV अपनाने, ग्रिड-स्केल रिन्यूएबल एनर्जी और कमर्शियल सेक्टर में एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के बढ़ते इस्तेमाल से बैटरी की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। सही नीतियों, निवेश और आर एंड डी के जरिए भारत एक मजबूत, टिकाऊ और रोजगार-सृजन करने वाला बैटरी इकोसिस्टम बना सकता है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि गीगाफैक्ट्री, सप्लाई चेन लोकलाइजेशन और रीसाइक्लिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर संयुक्त प्रयास भारत को ग्लोबल प्रतिस्पर्धियों से आगे ले जा सकते हैं और वास्तविक आत्मनिर्भरता की राह खोल सकते हैं।

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