केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में उन्होंने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए कई अहम सुझाव दिए। बैठक के दौरान उठाए गए मुख्य कदम और निर्देश इस प्रकार हैं।
पर्यावरण मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि प्रदूषण कम करने के लिए तत्काल समाधान के बजाय लंबी अवधि की नीतियों की जरूरत है। वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए इन उपायों पर चर्चा हुई।
समीक्षा बैठक में उद्योगों से होने वाले प्रदूषण के आंकड़ों पर भी गौर किया गया। एनसीआर के 240 औद्योगिक एस्टेट्स में से 227 पहले ही पीएनजी यानी क्लीन फ्यूल पर शिफ्ट हो चुके हैं। हालांकि औद्योगिक क्षेत्रों के बाहर अवैध रूप से चल रही फैक्ट्रियों पर चिंता जताई गई। मंत्री ने निर्देश दिया कि ऐसी अवैध इकाइयों को सील किया जाए।
23 जनवरी से सख्त एक्शन: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने उन 88 इकाइयों को नोटिस जारी किया है जिन्होंने अभी तक 'ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम' (OCEMS) नहीं लगाया है। इन इकाइयों के खिलाफ 23 जनवरी से बंद करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले कचरे के प्रबंधन पर भी जोर दिया गया। यह तय किया गया कि जब प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा होगा, तब तोड़-फोड़ वाली गतिविधियों को रोका जाएगा और कचरे के वैज्ञानिक निपटारे के लिए रिसाइकिलर एसोसिएशन के साथ भागीदारी की जाएगी। भूपेंद्र यादव ने कहा कि एनसीआर में वायु प्रदूषण इंसानी गतिविधियों और मौसम दोनों के कारण होता है। इन उपायों की सफलता के लिए जनता की भागीदारी और व्यवहार में बदलाव बेहद जरूरी है।