ईवी से टोल वसूली क्यों अवैध है
प्रश्नकाल के दौरान नार्वेकर ने कहा कि राज्य की ईवी नीति पहले से ही प्रभावी है। ऐसे में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे, नागपुर-मुंबई समृद्धि एक्सप्रेसवे और अटल सेतु पर किसी भी ईवी से टोल नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने दो टूक कहा, "अगर एक भी इलेक्ट्रिक वाहन से टोल वसूला जा रहा है, तो यह अवैध है।"
स्पीकर ने सरकार को निर्देश दिया कि टोल छूट की व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह लागू किया जाए।
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सरकार का पक्ष: क्रियान्वयन में रही हैं तकनीकी दिक्कतें
परिवहन से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ओर से मंत्री दादा भुसे ने स्वीकार किया कि कुछ ईवी उपयोगकर्ताओं से अब भी टोल वसूला जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य की ईवी नीति 23 मई 2025 को घोषित की गई थी और 22 अगस्त 2025 से इसे लागू किया गया। टोल छूट के लिए ईवी के फास्टैग डिटेल्स को वाहन (Vahan) पोर्टल पर पंजीकृत कर टोल प्रणालियों से जोड़ना जरूरी है।
भुसे ने कहा कि क्रियान्वयन की प्रक्रिया तीन महीने पहले शुरू हो चुकी है। लेकिन कुछ तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से समस्याएं बनी हुई हैं। सरकार इस प्रक्रिया को "तेज करने" पर काम कर रही है, ताकि सभी टोल प्वाइंट्स पर छूट प्रभावी हो सके।
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सरकार के दावे पर विधायकों ने उठाए सवाल
शिवसेना (UBT) के विधायक वरुण सरदेसाई ने मंत्री के बयान को चुनौती देते हुए कहा कि हाल तक ईवी से टोल कटता रहा है। उन्होंने विधानसभा में कहा, "मेरे पास 27 अक्तूबर तक के टोल कटने की रसीदें हैं। मैं अपने दावे को साबित कर सकता हूं।"
इस हस्तक्षेप से नीति और जमीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई एक बार फिर सामने आई।
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गलत वसूली पर रिफंड की व्यवस्था के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने सरकार को निर्देश दिया कि ईवी उपयोगकर्ताओं के लिए रिफंड मैकेनिज्म तैयार किया जाए। नार्वेकर ने कहा कि जिन ईवी मालिकों से गलत तरीके से टोल वसूला गया है, वे सबूत पेश कर अपना पैसा वापस पाने में सक्षम होने चाहिए। चाहे यह राशि टोल ऑपरेटर से लौटाई जाए या राज्य सरकार की ओर से।
उन्होंने दोहराया, "राज्य सरकार ईवी को बढ़ावा दे रही है। एक भी इलेक्ट्रिक वाहन से टोल नहीं कटना चाहिए। अगले आठ दिनों में छूट पूरी तरह लागू होनी चाहिए।" दादा भुसे ने सदन में भरोसा दिलाया कि सरकार स्पीकर के निर्देशों का पालन करेगी।
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महाराष्ट्र के ईवी मालिकों के लिए इसका क्या मतलब है
अध्यक्ष की तय की गई सख्त समयसीमा के बाद, इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को आठ दिनों के भीतर टोल छूट के पूर्ण क्रियान्वयन की उम्मीद है। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे, समृद्धि एक्सप्रेसवे और अटल सेतु पर ईवी से टोल कटने की समस्या समाप्त होने के साथ, गलत वसूली होने पर रिफंड की स्पष्ट व्यवस्था भी लागू की जाएगी। राज्य में ईवी अपनाने को बढ़ावा देने के बीच, आने वाले दिनों में इस नीति के जमीनी अमल पर सभी की नजर रहेगी।
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