महाराष्ट्र सरकार ने विपक्ष द्वारा हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट्स (HSRP) (एचएसआरपी) पर ज्यादा शुल्क लेने के आरोपों को खारिज कर दिया है। सरकार का कहना है कि ये शुल्क अन्य राज्यों के मुकाबले समान हैं और इसमें कोई अतिरिक्त वसूली नहीं की जा रही है।
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टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता
शुक्रवार देर शाम सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि रजिस्ट्रेशन प्लेट्स के टेंडर देने में पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया था। इस प्रक्रिया को एक उच्चाधिकार समिति ने मंजूरी दी थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि किसी तरह की अनियमितता नहीं हुई।
विपक्ष की जांच की मांग
एनसीपी (एसपी) और कांग्रेस ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर HSRP का ठेका पाने वाली कंपनियों की जांच की मांग की। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार ने एचएसआरपी शुल्क जरूरत से ज्यादा रखा है, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
वाहन चोरी रोकने के लिए HSRP जरूरी
एचएसआरपी विशेष सुरक्षा फीचर्स वाली लाइसेंस प्लेट होती है, जिसका मकसद वाहनों की चोरी और अन्य धोखाधड़ी रोकना है। सरकार ने 1 अप्रैल 2019 से पहले पंजीकृत सभी वाहनों के लिए एचएसआरपी को अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए सरकार ने अंतिम तारीख 30 अप्रैल तक बढ़ा दी है।
शुल्क दरें अन्य राज्यों के बराबर
सरकार के अनुसार, परिवहन आयुक्त कार्यालय ने समिति द्वारा स्वीकृत दरों के आधार पर एचएसआरपी शुल्क तय किए हैं। इन शुल्क में नंबर प्लेट और उनकी फिटिंग की लागत शामिल है।
सरकार ने दावा किया कि अन्य राज्यों में जीएसटी को छोड़कर एचएसआरपी की दरें दोपहिया वाहनों के लिए 420-480 रुपये, तिपहिया वाहनों के लिए 450-550 रुपये और चार पहिया वाहनों और भारी वाहनों के लिए 690-800 रुपये के बीच हैं।
इसने बताया कि महाराष्ट्र में जीएसटी को छोड़कर शुल्क दोपहिया वाहनों के लिए 450 रुपये, तिपहिया वाहनों के लिए 500 रुपये और चार पहिया वाहनों और भारी वाहनों के लिए 745 रुपये थे।
विपक्ष के नेताओं ने क्या कहा?
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल और एनसीपी (एसपी) के प्रमुख जयंत पाटिल ने मुख्यमंत्री को अलग-अलग पत्र लिखकर सरकार पर ज्यादा शुल्क लेने का आरोप लगाया है और ठेके की निष्पक्ष जांच की मांग की है।