अस्पताल के बाहर खड़ी थी लैंबॉर्गिनी
कुछ ही समय बाद अस्पताल के बाहर एक लैंबॉर्गिनी पहुंची। मुकुंद और उनकी मां को मुंबई की सड़कों पर एक खास ड्राइव के लिए ले जाया गया। कुछ घंटों के लिए अस्पताल की मशीनों की आवाज, सफेद गलियारों और इलाज की चिंता पीछे छूट गई। उनकी जगह शहर की हलचल, खुली सड़कें और एक बच्चे की मुस्कान ने ले ली। उस वक्त मुकुंद एक मरीज नहीं, बल्कि सिर्फ एक बच्चा था, जो अपने सपने को जी रहा था।
धोनी से मिलने का सपना अभी अधूरा
X पर एक अलग पोस्ट में, टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. परमेश सी एस ने बताया कि बच्चा पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से मिलने का सपना देखता है। लग्जरी कार की सवारी तो पूरी हो गई थी, लेकिन क्रिकेट के दिग्गज से मिलना अभी बाकी था। डॉ. परमेश ने सोशल मीडिया यूजर्स से मदद की अपील की, और कहा कि धोनी के साथ थोड़ी देर की वर्चुअल बातचीत भी उस छोटे लड़के के लिए बहुत मायने रखेगी।
सोशल मीडिया पर मिली सराहना
इस भावुक कहानी ने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल छू लिया। कई यूजर्स ने इस पहल को बेहद प्यारा और इंसानियत से भरा बताया। वहीं, कई लोगों ने लिखा कि इस छोटे-से पल ने मुकुंद के चेहरे पर जो खुशी लाई होगी, वह अनमोल है।
कभी-कभी किसी बच्चे की छोटी-सी इच्छा उसके इलाज से भी ज्यादा सुकून दे सकती है। मुकुंद की कहानी यह दिखाती है कि संवेदनशीलता और समय पर किया गया एक छोटा कदम भी किसी के जीवन में बड़ी खुशी भर सकता है।
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