कैसे हुई चोरी? पुलिस की शुरुआती जांच में खुलासा
पुलिस की 16 अप्रैल की रिपोर्ट में बताया गया कि इंजन डिपार्टमेंट का एक टीम लीडर और एक सेक्शन हेड, जो अब कंपनी में नहीं हैं, उन्होंने फर्जी इनवॉइस और गेट पास के जरिए इन इंजनों को बाहर भिजवाया। इस काम में दो और लोग शामिल थे जो ट्रांसपोर्ट का इंतजाम करते थे, साथ ही दो कबाड़ व्यापारी भी, जिन्होंने दिल्ली तक इन इंजनों को बेच दिया।
जांच अधिकारी इंस्पेक्टर के. राघवन के मुताबिक, इस पूरे ऑपरेशन में नकली रजिस्ट्रेशन नंबर वाली कई ट्रकों का इस्तेमाल हुआ और लगातार अवैध ट्रांजैक्शन्स किए गए। संपर्क किए जाने पर राघवन ने गोपनीयता का हवाला देते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
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कंपनी का बयान: अब इंटरनल सिक्योरिटी सख्त की जा रही है
किआ इंडिया ने मीडिया को बताया कि उन्होंने पिछले साल अपने इन्वेंटरी मैनेजमेंट सिस्टम को अपग्रेड किया था, तब जाकर यह गड़बड़ी सामने आई। कंपनी ने खुद इंटरनल जांच की, फिर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और अब वे अपने सिस्टम और मॉनिटरिंग को और मजबूत बना रहे हैं।
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी, दूसरा फरार
इस केस में एक आरोपी विनायगमूर्ति वेलुचामी (37) को गिरफ्तार किया गया है, जो इंजन डिस्पैच सेक्शन का हेड था। उसने कोर्ट में बेल के लिए अर्जी दी है और अपनी बेगुनाही का दावा किया है। उसका कहना है कि उसने 2023 में कंपनी छोड़ दी थी और इन चोरियों से उसका कोई लेना-देना नहीं है।
दूसरा आरोपी पट्टन सलीम (33) है, जो 2020 से 2025 तक टीम लीडर के रूप में काम कर चुका है। फिलहाल उसकी लोकेशन का कोई पता नहीं चला है और पुलिस दस्तावेजों में जो नंबर दिए गए थे, वे भी बंद हैं।
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अब तक एफआईआर नहीं, लेकिन दोनों आरोपी जांच में नामजद
हालांकि अभी तक इन दोनों पर कोई औपचारिक चार्ज नहीं लगाए गए हैं, लेकिन पुलिस की जांच में ये दोनों मुख्य आरोपी माने जा रहे हैं। दस्तावेजों के अनुसार, इस तरह की चोरी और साजिश अगर साबित होती है तो भारतीय कानून के तहत 10 साल या उससे ज्यादा की सजा भी हो सकती है।
कंपनी स्तर पर चोरी का ऐसा मामला बेहद दुर्लभ
भारत में छोटी-मोटी चोरी आम बात है, लेकिन इस तरह की लंबे समय तक चली फैक्ट्री स्तर की साजिश कम ही देखने को मिलती है। किआ ने सबसे पहले जनवरी 2025 में स्टॉक मिलान के दौरान इस चोरी का पता लगाया। मार्च में दर्ज शिकायत में बताया गया कि करीब 940 इंजन गायब थे, लेकिन बाद में संख्या बढ़कर 1,008 तक पहुंच गई।
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पुलिस को मिले अहम सबूत
पुलिस को 9 मोबाइल फोन मिले हैं, जिनमें व्हाट्सएप चैट्स, ट्रक की तस्वीरें और ट्रांसपोर्ट इनवॉइस जैसी जानकारियां मौजूद हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, चोरी से हुई कमाई को आरोपियों ने कर्ज चुकाने, जमीन-जायदाद खरीदने और कारोबार में निवेश करने में इस्तेमाल किया।
इस घटना ने न सिर्फ किआ बल्कि पूरे इंडस्ट्रियल सेक्टर को हिला कर रख दिया है। इससे न केवल कंपनी की साख को नुकसान पहुंचा है, बल्कि कर्मचारियों की नौकरी और इंडस्ट्री में भरोसे पर भी असर पड़ा है।
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