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Bike Taxi Ban: कर्नाटक में बाइक टैक्सी बैन पर फिर विवाद, उद्योग संगठन ने सरकार को पत्र लिखकर की बैठक की मांग

Mon, 24 Nov 2025 08:40 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कर्नाटक सरकार से अनुरोध किया है कि वह राज्य में बाइक टैक्सी संचालन के लिए नीति ढांचे पर सभी हितधारकों के साथ औपचारिक बैठक करे।
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Bike Taxi - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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डिजिटल सेवाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले उद्योग संगठन इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) ने कर्नाटक सरकार से अनुरोध किया है कि वह राज्य में बाइक टैक्सी संचालन के लिए नीति ढांचे पर सभी हितधारकों के साथ औपचारिक बैठक आयोजित करे। यह मांग तब उठी है जब यह सामने आया कि राज्य सरकार अभी भी बाइक टैक्सी पर प्रतिबंध को जारी रखने के पक्ष में है।
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IAMAI का सरकार पर आरोप
IAMAI (आईएएमएआई) ने राज्य के परिवहन सचिव एन. वी. प्रसाद को भेजे गए पत्र में चिंता जताई कि सरकार ने बाइक टैक्सी सेवाओं को प्रतिबंधित करने का रुख अपनाया है, बिना किसी बाहरी हितधारक से सलाह-मशविरा किए। पत्र में बताया गया कि सरकार ने न तो उपभोक्ता समूहों, न ड्राइवर यूनियनों, न विशेषज्ञों और न ही उद्योग से जुड़े प्लेटफॉर्मों से कोई चर्चा की।

आईएएमएआई ने याद दिलाया कि वह 750 से अधिक भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है, जिनमें बड़े उद्योग समूह और स्टार्टअप शामिल हैं।

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विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के बाद बढ़ी चिंता
आईएएमएआई का यह पत्र उस समय आया है जब परिवहन सचिव की अध्यक्षता वाली 11-सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने राज्य में बाइक टैक्सी सेवाओं पर बैन जारी रखने की सिफारिश की है। समिति में किसी भी निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ को शामिल नहीं किया गया था। सरकार ने यह रिपोर्ट कर्नाटक हाई कोर्ट में पेश की है, जहां इस मामले की सुनवाई चल रही है।

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"नीति निर्माण के लिए समावेशी परामर्श जरूरी"
आईएएमएआई ने अपने पत्र में लिखा कि व्यापक हितधारक परामर्श नीति निर्माण की प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा है। उन्होंने उदाहरण दिया कि दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने बाइक टैक्सी संबंधी नीतियां तैयार करने से पहले उपभोक्ता समूहों, ड्राइवर यूनियनों, उद्योग संगठनों और थिंक-टैंक सहित सभी पक्षों से व्यापक चर्चा की थी। 

आईएएमएआई ने कर्नाटक में भी इसी तरह का समावेशी दृष्टिकोण अपनाने की मांग की।

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"गिग वर्कर्स और यात्रियों को भारी नुकसान"
एसोसिएशन का कहना है कि सरकार का वर्तमान रुख:
  • हजारों गिग वर्कर्स की आजीविका को प्रभावित कर रहा है
  • पूरी मोबिलिटी इकोसिस्टम को बाधित कर रहा है
  • और विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले बेंगलुरु में यात्रियों से सस्ती और व्यवहार्य परिवहन सुविधा छीन रहा है
34 पन्नों की सरकारी रिपोर्ट बाइक टैक्सी प्रतिबंध को यातायात अव्यवस्था और सड़क सुरक्षा जोखिमों के आधार पर सही ठहराती है।

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हाई कोर्ट में मामला
हाई कोर्ट ओला, उबर और रैपिडो द्वारा दायर रिट अपीलों पर सुनवाई कर रहा है। ये अपीलें उस सिंगल-बेंच आदेश के खिलाफ हैं जिसने नीति के अभाव में बाइक टैक्सी संचालन पर रोक लगा दी थी। बाइक टैक्सी पर आधिकारिक प्रतिबंध 16 जून से लागू है। मामले की अगली सुनवाई 24 नवंबर को निर्धारित है।

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मंत्री प्रियंक खड़गे बोले
बंगलूरू टेक समिट 2025 में आईटी/बीटी मंत्री प्रियंक खड़गे ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी नई तकनीक को केवल इसलिए नहीं रोकना चाहती क्योंकि उसके लिए कोई नीति नहीं बनी है।

उन्होंने कहा कि ऐसी कंपनियों को रेगुलेटरी सैंडबॉक्स में काम करने दिया जाता है, ताकि नवाचार जारी रहे और बाद में नीति बनाई जा सके। लेकिन अधिकतर सरकारों की पहली प्रतिक्रिया बैन लगाने की होती है, जैसा ओला, उबर और रैपिडो के मामलों में देखा गया। 

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