उचिदा की विदाई और वित्तीय समस्याएं
उचिदा के नेतृत्व पर पिछले साल नवंबर से ही सवाल उठने लगे थे, जब कंपनी ने बताया कि उसकी छमाही आय में 94 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। इसके साथ ही निसान ने 9,000 नौकरियों में कटौती और उत्पादन क्षमता में 20 प्रतिशत की कमी की योजना का एलान किया था।
मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उचिदा ने स्वीकार किया कि कंपनी के भीतर भी उनके नेतृत्व को लेकर संदेह बढ़ रहा था। उन्होंने कहा, "इस तरह से पद छोड़ना मेरे लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। निसान की सबसे बड़ी प्राथमिकता अब खुद को इस स्थिति से निकालकर स्थिरता हासिल करना है।"
जब से उचिदा 2019 में सीईओ बने थे, तब से निसान का बाजार मूल्य 40 प्रतिशत से अधिक घट चुका है। दिसंबर 2019 में कंपनी की वैल्यू 2.91 ट्रिलियन जापानी येन थी, जो अब घटकर 1.63 ट्रिलियन जापानी येन (11 अरब डॉलर) रह गई है।
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एस्पिनोसा की प्राथमिकताएं और चुनौतियां
जब एस्पिनोसा से कंपनी के भविष्य और संभावित साझेदारियों पर सवाल किए गए, तो उन्होंने कहा, "मुझे अभी-अभी इस पद के बारे में बताया गया है, इसलिए मुझे इस पर सोचने के लिए कुछ समय चाहिए। मैं फिलहाल किसी अटकल पर टिप्पणी नहीं करूंगा।"
मूल रूप से मैकेनिकल इंजीनियर रहे एस्पिनोसा वर्तमान में निसान और इनफिनिटी ब्रांड्स की भविष्य की उत्पाद और सेवा रणनीतियों की देखरेख कर रहे हैं। उनकी प्रोफेशनल प्रोफाइल के अनुसार, ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की तीन सबसे बड़ी चुनौतियां - इलेक्ट्रिफिकेशन (इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुझान), कनेक्टिविटी और ऑटोनॉमस ड्राइविंग टेक्नोलॉजी हैं, जिनमें निसान पिछड़ता हुआ नजर आ रहा है।
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नए वित्तीय भागीदार की तलाश में निसान
सीईओ बनने के बाद एस्पिनोसा के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी निसान को वित्तीय रूप से मजबूती देना। हाल ही में होंडा के साथ उसकी साझेदारी टूट गई, जिससे उसे बड़ी क्षति पहुंची। इस डील के सफल होने पर निसान को टोयोटा मोटर कॉर्प और चीन की BYD कंपनी जैसी कंपनियों के खिलाफ मजबूती से खड़ा होने का मौका मिलता। लेकिन दोनों कंपनियों के बीच पावर बैलेंस को लेकर मतभेद थे, जिसके चलते फरवरी में साझेदारी खत्म हो गई।
अब निसान एक नई साझेदारी की तलाश में है। फरवरी में ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, निसान किसी अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी के साथ गठजोड़ करने की योजना बना रहा है। होंडा डील के विफल होने के बाद, फॉक्सकॉन (आईफोन निर्माता कंपनी) के साथ संभावित बातचीत के संकेत मिले हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण में उतरना चाहती है।
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