उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता आयोग ने श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को कार मालिक हरविंदर सिंह को 4 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। कंपनी ने सिंह का इंश्योरेंस क्लेम इस आधार पर खारिज कर दिया था कि दुर्घटना के वक्त ड्राइवर का ड्राइविंग लाइसेंस एक्सपायर हो चुका था।
क्या है पूरा मामला?
घटना 8 अप्रैल 2017 की है, जब ऋषिकेश के पास पावकी देवी रोड पर एक सुरक्षा दीवार गिरने से सिंह की कार खाई में गिर गई थी। इस हादसे में ड्राइवर जगदीश चौहान की मौत हो गई थी। बीमा पॉलिसी मई 2016 में ली गई थी और दुर्घटना के समय वैध थी। हालांकि, इंश्योरेंस कंपनी ने दावा खारिज करते हुए कहा कि ड्राइवर का लाइसेंस 23 मार्च 2017 को ही समाप्त हो चुका था।
ग्रेस पीरियड बना फैसले का आधार
हरविंदर सिंह ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। अक्टूबर 2022 में आयोग ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। इंश्योरेंस कंपनी ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की, लेकिन वहां भी फैसला सिंह के पक्ष में गया।
सिंह के वकील ने दलील दी कि मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार, ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू करने के लिए 30 दिन का ग्रेस पीरियड होता है और हादसा उसी अवधि में हुआ। आयोग ने माना कि अगर ड्राइवर जीवित होता, तो वह निश्चित रूप से लाइसेंस रिन्यू करवा लेता।
मुआवजा घटाकर 4 लाख किया गया
राज्य आयोग ने जिला आयोग का फैसला बरकरार रखा, लेकिन मुआवजे की राशि 6 लाख रुपये से घटाकर 4 लाख रुपये कर दी। इसके अलावा इंश्योरेंस कंपनी को शिकायत दर्ज करने की तारीख (2017) से 9% वार्षिक ब्याज और 5,000 रुपये मुकदमे के खर्च के तौर पर भी देने होंगे।