आजकल कारों को मॉडिफाई कराने का काफी क्रेज है। चौड़े टायर, नई लाइट्स या फिर गाड़ी का कलर बदलवाने का शौक कई लोगों को होता है। लेकिन क्या आपको पता है कि आपका यह शौक लाखों रुपये का नुकसान करवा सकता है?
मान लीजिए आपके पास 17 लाख रुपये की महिंद्रा थार है और आपने 42 हजार रुपये देकर उसका फुल इंश्योरेंस भी करा रखा है। अचानक आपकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो जाता है, जिसमें करीब 3.8 लाख रुपये का नुकसान होता है। आप बेफिक्र होकर बीमा कंपनी को क्लेम के लिए बुलाते हैं। सर्वेयर आता है, फोटो लेता है, लेकिन 7 दिन बाद आपको पता चलता है कि आपका क्लेम रिजेक्ट हो गया है।
Harpreet Singh bought a Mahindra Thar for ₹17.5 lakh.
— Technical Charts (@Technicalchart1) June 21, 2026
Blacked out the stock headlights.
Added LED DRLs.
Put a snorkel on the hood.
Wrapped it matte olive.
Classic Punjab modification job.
He paid ₹42,000/year for comprehensive insurance.
Then on NH-44, near Panipat, a truck… pic.twitter.com/Q3Joi8kXyV
हरप्रीत सिंह ने अपनी थार को कूल लुक देने के लिए उसमें कुछ आफ्टर-मार्केट मॉडिफिकेशन कराए थे:
गाड़ी के रंग को बदलने के लिए उस पर मैट ऑलिव रंग की फिल्म/रैप लगवा ली।
क्लेम रिजेक्ट करते हुए बीमा कंपनी ने साफ कहा कि, "एक्सीडेंट के वक्त गाड़ी की जो हालत थी, वह हमारी पॉलिसी में दर्ज डिटेल्स से बिल्कुल अलग थी। पॉलिसी लेते समय हमें इन बदलावों के बारे में नहीं बताया गया था।"
बीमा अधिनियम की धारा 64VB के मुताबिक, अगर आप गाड़ी में कोई भी ऐसा बदलाव करते हैं जो फैक्ट्री-फिटेड चीजों से अलग है, तो आपको उसकी जानकारी तुरंत बीमा कंपनी को देनी होगी। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो कोई जानकारी छिपाने के जुर्म में आपकी पॉलिसी अमान्य हो जाएगी। ऐसे मामलों में कंज्यूमर कोर्ट भी आपकी कोई मदद नहीं कर पाएगा।
कार में बड़े अलॉय व्हील लगाना हो, कलर वाली फिल्म लगवानी हो या लाइट्स बदलनी हों- मॉडिफिकेशन कराने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसका सही तरीका जानना जरूरी है:
गाड़ी में नए बदलाव करना हर किसी को अच्छा लगता है लेकिन अगर सही नियमों का पालन नहीं किया, तो एक्सीडेंट के वक्त यही शौक आपको रुला भी सकता है। इसलिए सतर्क रहें और अपनी बीमा कंपनी को हमेशा अपडेट रखें।