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Volkswagen India: फॉक्सवैगन इंडिया को सरकार से मिला 1.4 अरब डॉलर की टैक्स चोरी का नोटिस, रिपोर्ट में खुलासा

Fri, 29 Nov 2024 07:45 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत ने जर्मन वाहन निर्माता कंपनी Volkswagen (फॉक्सवैगन) को एक नोटिस जारी किया है। 30 सितंबर को जारी एक नोटिस में कहा गया है कि फॉक्सवैगन "लगभग पूरी" कार को बिना असेंबल की स्थिति में आयात करती थी।
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Volkswagen Car - फोटो : Volkswagen
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विस्तार
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भारत ने जर्मन वाहन निर्माता कंपनी Volkswagen (फॉक्सवैगन) को एक नोटिस जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि कंपनी ने ऑडी, वी.डब्लू. और स्कोडा कारों के कलपुर्जों पर "जानबूझकर" कम आयात कर (इंपोर्ट टैक्स) का भुगतान करके 1.4 अरब डॉलर की टैक्स चोरी की है। एक दस्तावेज से यह पता चलता है कि यह इस तरह की सबसे बड़ी मांगों में से एक है।
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30 सितंबर को जारी एक नोटिस में कहा गया है कि फॉक्सवैगन "लगभग पूरी" कार को बिना असेंबल की स्थिति में आयात करती थी। जिस पर भारत में CKD या पूरी तरह से तैयार यूनिट्स के नियमों के तहत 30-35 प्रतिशत आयात कर (इंपोर्ट टैक्स) लगता है। लेकिन इन आयातित वस्तुओं को "व्यक्तिगत भागों" (इंडीविजुअल पार्ट्स) के रूप में "गलत घोषित और गलत वर्गीकरण" करके करों से बचती थी। और सिर्फ 5-15 प्रतिशत शुल्क का भुगतान करती थी। 

इस तरह के आयात फॉक्सवैगन की भारतीय इकाई, स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया द्वारा स्कोडा सुपर्ब और कोडियाक, ऑडी ए4 और क्यू5 जैसी लग्जरी कारों और वीडब्ल्यू की टिगुआन एसयूवी सहित अपने मॉडलों के लिए किए गए थे। भारतीय जांच में पाया गया कि अलग-अलग शिपमेंट खेपों का इस्तेमाल पहचान से बचने और उच्च करों के "जानबूझकर भुगतान से बचने" के लिए किया गया था। 

महाराष्ट्र के सीमा शुल्क आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी 95 पृष्ठों के नोटिस में कहा गया है, "यह लॉजिस्टिकल व्यवस्था एक आर्टिफिशियल अरेंजमेंट (कृत्रिम व्यवस्था) है... परिचालन संरचना और कुछ नहीं, बल्कि लागू शुल्क का भुगतान किए बिना माल को निकालने की एक चाल है।" मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह नोटिस सार्वजनिक नहीं है, लेकिन उसने इसे देखा है।

रिपोर्ट में भारत में इस टैक्स संबंधी नोटिस की सूचना दिए जाने के बाद फ्रैंकफर्ट स्टॉक एक्सचेंज में फॉक्सवैगन के शेयरों में 2.13 प्रतिशत तक की गिरावट आई।

प्राधिकरण ने कहा कि 2012 से, फॉक्सवैगन की भारतीय इकाई को भारत सरकार को लगभग 2.35 अरब डॉलर के आयात कर और कई अन्य संबंधित शुल्कों का भुगतान करना चाहिए था। लेकिन उसने सिर्फ 981 मिलियन डॉलर का भुगतान किया, जो 1.36 अरब डॉलर की कमी के बराबर है।

एक बयान में, स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया ने कहा कि वह एक "जिम्मेदार संगठन है, जो सभी वैश्विक और स्थानीय कानूनों और नियमों का पूरी तरह से पालन करता है। हम नोटिस का विश्लेषण कर रहे हैं और अधिकारियों को अपना पूरा सहयोग दे रहे हैं।"

नोटिस में 30 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है। लेकिन फॉक्सवैगन ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की कि उसने ऐसा किया है या नहीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के वित्त मंत्रालय और सीमा शुल्क विभाग ने फिलहाल के सवालों का जवाब नहीं दिया।

सरकारी प्राधिकरण द्वारा जारी तथाकथित "कारण बताओ नोटिस" में फॉक्सवैगन की स्थानीय इकाई से यह बताने के लिए कहा गया है कि उसके कथित कर चोरी के लिए भारतीय कानूनों के तहत दंड और ब्याज क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए। जो कि 1.4 अरब डॉलर के कर चोरी के अलावा है।

नाम न बताने की शर्त पर बात करने वाले एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि ऐसे मामलों में आम तौर पर जुर्माना, अगर कंपनी दोषी पाई जाती है, तो चोरी की गई राशि का 100 प्रतिशत तक हो सकता है। जिसके लिए कंपनी को कुल मिलाकर लगभग 2.8 अरब डॉलर का भुगतान करना पड़ सकता है।
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उच्च कर और लंबे कानूनी विवाद अक्सर भारत में विदेशी कंपनियों के लिए एक दुखदायी मुद्दा रहे हैं।

उदाहरण के लिए, इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता टेस्ला ने कई वर्षों से आयातित कारों पर उच्च करों की शिकायत की है। और वोडाफोन ने पिछले करों (बैक टैक्स) से संबंधित मामलों की लड़ाई लड़ी है। चीनी वाहन निर्माता BYD को भी आयात पर लगभग 9 मिलियन डॉलर का कम टैक्स चुकाने के लिए चल रही भारतीय टैक्स जांच का सामना करना पड़ रहा है।
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