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Rare Earth Magnets: रेयर अर्थ मैग्नेट्स के आयात को लेकर इंडियन ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने सरकार से मांगी मदद

Mon, 09 Jun 2025 09:04 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने सरकार से अपील की है कि वह चीन से रेयर अर्थ मैग्नेट्स के आयात को लेकर जरूरी मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी लाने में मदद करे। ये मैग्नेट्स खासतौर पर पैसेंजर कारों सहित कई क्षेत्रों में इस्तेमाल किए जाते हैं।
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Car Plant - फोटो : Freepik
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विस्तार
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भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने सरकार से अपील की है कि वह चीन से रेयर अर्थ मैग्नेट्स के आयात को लेकर जरूरी मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी लाने में मदद करे। ये मैग्नेट्स खासतौर पर पैसेंजर कारों सहित कई क्षेत्रों में इस्तेमाल किए जाते हैं।
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चीन से मंजूरी मिलने में हो रही देरी
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों का कहना है कि, देश के कई आपूर्तिकर्ताओं ने चीन में अपने स्थानीय विक्रेताओं के जरिए वहां की सरकार से रेयर अर्थ मैग्नेट्स के निर्यात के लिए अनुमोदन मांगा है। लेकिन अब तक किसी भी मामले में मंजूरी नहीं मिली है। दरअसल, चीन पूरी दुनिया की 90 प्रतिशत से ज्यादा रेयर अर्थ मैग्नेट्स की प्रोसेसिंग क्षमता पर नियंत्रण रखता है। जो ऑटोमोबाइल्स, घरेलू उपकरणों और क्लीन एनर्जी सेक्टर में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं।

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चीन ने अप्रैल से लागू कीं नई पाबंदियां
चीन की सरकार ने 4 अप्रैल से नए नियम लागू किए हैं जिनके तहत सात तरह के रेयर अर्थ एलिमेंट्स और उनसे जुड़े मैग्नेट्स के निर्यात के लिए स्पेशल एक्सपोर्ट लाइसेंस अनिवार्य कर दिया गया है। इस कारण से भारत समेत कई देशों को सप्लाई मिलने में मुश्किलें आ रही हैं।

स्विफ्ट का प्रोडक्शन भी रुका, भारत में भी असर
जापान में सुजुकी मोटर ने अपनी लोकप्रिय कार स्विफ्ट का प्रोडक्शन चीन की पाबंदियों की वजह से रोक दिया है। भारत में मारुति सुजुकी के वरिष्ठ अधिकारी राहुल भारती ने बताया कि चीन ने अब ऐसे मामलों में एंड-यूजर सर्टिफिकेट की मांग की है। जिसे भारत सरकार द्वारा सत्यापित और चीन सरकार द्वारा मंजूर किया जाना जरूरी है। इस प्रक्रिया पर सरकार और उद्योग के बीच बातचीत जारी है।

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'ईवी सेक्टर के लिए बड़ा झटका'
डेलॉयट इंडिया के पार्टनर और ऑटोमोबाइल सेक्टर से संबंधित रजत महाजन के अनुसार, यह कमी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (ईवी) की सप्लाई चेन के लिए एक बड़ा झटका है। इलेक्ट्रिक मोटर, जो ईवी का सबसे अहम हिस्सा होती है, उसमें रेयर अर्थ मेटल्स की भारी मात्रा में जरूरत होती है। इन मैग्नेट्स की खासियत यह है कि ये उच्च तापमान पर भी कम एनर्जी लॉस के साथ ज्यादा चुंबकीय ताकत रखते हैं।

विकल्प खोजना आसान नहीं
महाजन ने यह भी बताया कि ऑटो इंडस्ट्री लंबे समय से इन मैग्नेट्स के विकल्प तलाश रही है। लेकिन अब तक कोई भी विकल्प वाणिज्यिक स्तर पर ईवी जैसी हाई-डिमांड टेक्नोलॉजी में सफल नहीं हुआ है। इसके अलावा, मौजूदा समय में पुराने मैग्नेट्स को री-साइकिल करके इतनी मात्रा में नई सप्लाई हासिल करना भी मुमकिन नहीं है।

उन्होंने कहा, "अगर ये संकट जल्द सुलझा नहीं, तो बड़े ऑटोमोबाइल ब्रांड्स को पावरट्रेन और मटेरियल्स को लेकर रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है।" 

उन्होंने कहा, "उम्मीद है कि यह स्थिति कूटनीतिक माध्यमों से हल हो जाएगी। लेकिन अगर यह जारी रहा, तो हम बड़े ओईएम के लिए पावरट्रेन की ओर बदलाव देख सकते हैं।"

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ICRA की चेतावनी: कीमतों में बढ़ोतरी और प्रोडक्शन पर असर

रेटिंग एजेंसी ICRA के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट श्रीकुमार कृष्णमूर्ति ने बताया कि ईवी में रेयर अर्थ मैग्नेट्स का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक मोटर, रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग और पावर स्टीयरिंग जैसे अहम फीचर्स में होता है। चीन की तरफ से एक्सपोर्ट पर लगाई गई पाबंदियां ईवी सेक्टर में महंगाई और प्रोडक्शन शेड्यूल में रुकावट ला सकती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि भले ही ऑटो कंपनियां चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही हों। लेकिन इन मैग्नेट्स का कोई तुरंत और व्यवहारिक विकल्प उपलब्ध नहीं है।

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कौन-कौन से मैटेरियल्स हैं प्रभावित
इस संकट में जो रेयर अर्थ मटेरियल्स सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, उनमें सैमारीयम (Samarium), गैडोलिनियम (Gadolinium), टरबियम (Terbium), डाइस्प्रोसियम (Dysprosium) और ल्यूटेशियम (Lutetium) शामिल हैं। ये सिर्फ ईवी ही नहीं, बल्कि स्मार्टफोन, मिसाइल टेक्नोलॉजी और अन्य हाई-टेक उपकरणों में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

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