क्या JLR भारत में उत्पादन पर दोबारा विचार करेगा?
इस नई डील के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि कई ब्रिटिश ऑटो कंपनियां भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेटअप लगाने की तरफ आकर्षित होंगी। टाटा मोटर्स के स्वामित्व वाली जगुआर लैंडरोवर (जेएलआर) इस लिस्ट में सबसे ऊपर मानी जा रही है। दरअसल, जेएलआर पहले से ही भारत में अपनी अगली पीढ़ी की इलेक्ट्रिक कारें बनाने की योजना बना रही थी। लेकिन इस साल मार्च में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने यह प्लान फिलहाल रोक दिया है।
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क्यों रुक गई थी जेएलआर की भारत योजना?
जेएलआर का कहना था कि उन्हें भारत में बनने वाले ईवी पार्ट्स की गुणवत्ता और कीमत में संतुलन नहीं मिल पा रहा था। पिछले साल कंपनी ने तमिलनाडु में टाटा मोटर्स की एक अरब डॉलर (करीब 8,700 करोड़ रुपये) की फैक्ट्री में लग्जरी ईवी बनाने की योजना बनाई थी। लेकिन जनवरी 2025 से इस प्रोजेक्ट पर काम ठप है।
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एफटीए के बाद उम्मीदें फिर जगीं
अब जबकि नया एफटीए लागू हो गया है, तो उम्मीद की जा रही है कि जेएलआर अपने इस फैसले पर दोबारा विचार कर सकती है। अगर समझौते की शर्तें जेएलआर के पक्ष में होती हैं, तो भारत में ईवी बनाना कंपनी के लिए सस्ता और मुनाफे वाला सौदा साबित हो सकता है। इसके साथ ही, टाटा मोटर्स की इस प्रोजेक्ट में गहरी भागीदारी जेएलआर को एक भरोसा भी देती है।
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टाटा की ईवी सीरीज 'Avinya' भी रुकी हुई है
जेएलआर ने प्लान किया था कि वह तमिलनाडु की इस फैक्ट्री में हर साल करीब 70,000 इलेक्ट्रिक कारें बनाएगी। जिनमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों को टारगेट किया जाएगा। इन कारों को जेएलआर की नई EMA (इलेक्ट्रिफाइड मॉड्यूलर आर्किटेक्चर) टेक्नोलॉजी पर बनाया जाना था। टाटा मोटर्स की प्रीमियम ईवी सीरीज "Avinya" (अविन्या), जो EMA पर ही आधारित है, वह भी इसी वजह से रोक दी गई है।
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आगे का रास्ता क्या है?
एफटीए के बाद अब टाटा मोटर्स पर भी दबाव है कि वह जेएलआर को भारत में फिर से मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने के लिए कहे। क्योंकि इसी फैक्ट्री में टाटा ने 25,000 अविन्या ईवी बनाने की भी योजना बनाई थी। यह प्लांट सितंबर से गैर-ईवी गाड़ियों का असेंबली काम भी शुरू करने वाला है। और अगले 5 से 7 वर्षों में इसकी पूरी उत्पादन क्षमता तक पहुंचने की उम्मीद है।
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