भारत का सेकंड हैंड कार बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। इसी बीच इंडियन ऑटो एलपीजी कोएलिशन (IAC) ने सरकार से समयबद्ध राष्ट्रीय रेट्रोफिट नीति लागू करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इससे पहले से चल रही पेट्रोल और डीजल कारों को सुरक्षित और प्रमाणित तरीके से ऑटो एलपीजी में बदला जा सकेगा।
IAC (आईएसी) के मुताबिक, यह कदम तेजी से बढ़ रहे सेकेंड हैंड कार बाजार को प्रदूषण कम करने और हवा की गुणवत्ता सुधारने का एक प्रभावी माध्यम बना सकता है। खासकर दिल्ली-एनसीआर और अन्य प्रदूषण प्रभावित शहरों में।
IAC के अनुसार, देश में पुरानी कारों की मांग नई कारों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रही है।
वर्तमान में यूज्ड कार बाजार की वार्षिक बिक्री करीब 60 लाख वाहनों के स्तर तक पहुंच रही है।
2023 में प्री-ओन्ड कारों की बिक्री लगभग 46 लाख यूनिट रही।
2030 तक यह आंकड़ा 1 करोड़ से अधिक वाहनों तक पहुंचने का अनुमान है।
इस अवधि में बाजार की वार्षिक औसत वृद्धि दर (CAGR) करीब 12% से 13% रहने का अनुमान है।
IAC का दावा है कि मौजूदा समय में देश में हर नई कार की बिक्री पर एक से अधिक पुरानी कार का लेन-देन हो रहा है।
आने वाले वर्षों तक बड़ी संख्या में इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) यानी पेट्रोल और डीजल वाहन सड़कों पर चलते रहेंगे।
यदि इनमें से कुछ वाहनों को स्वच्छ ईंधन में बदला जाए, तो वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है।
IAC ने सरकार से समर्पित और समयबद्ध राष्ट्रीय रेट्रोफिट नीति लागू करने की अपील की है।
पहले से उपयोग में मौजूद पेट्रोल और डीजल वाहनों को ऑटो एलपीजी में बदलने की अनुमति देना।
यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और प्रमाणित हो।
पूरे देश में इसके लिए एक समान नियामकीय ढांचा तैयार किया जाए।
IAC का मानना है कि इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन तकनीक का विकास जारी है, लेकिन मौजूदा वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए रेट्रोफिट एक व्यावहारिक और तेज़ समाधान हो सकता है।
कम समय में उत्सर्जन घटाने का विकल्प।
पहले से सड़क पर मौजूद वाहनों का बेहतर उपयोग।
प्रदूषण नियंत्रण में मदद।
IAC के महानिदेशक सुयश गुप्ता के अनुसार, भारत के पास पहले से चल रहे वाहनों में स्वच्छ ईंधन अपनाकर शहरी वायु गुणवत्ता सुधारने का बड़ा अवसर है।
पेट्रोल और डीजल वाहनों को ऑटो एलपीजी में बदलने की मजबूत नीति वायु प्रदूषण से निपटने में मदद कर सकती है।
ऑटो एलपीजी ऐसा ईंधन है जो पेट्रोल की तुलना में करीब 40 प्रतिशत सस्ता है।
इसके उपयोग से उत्सर्जन भी काफी कम होता है।
IAC ने लागत के लिहाज से भी ऑटो एलपीजी को एक किफायती विकल्प बताया है।
ऑटो एलपीजी पर प्रति किलोमीटर ईंधन लागत पेट्रोल की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत से 45 प्रतिशत कम बताई गई है।
एक वाहन को ऑटो एलपीजी में बदलने का खर्च लगभग 30,000 रुपये है।
यह खर्च इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने में लगने वाले कई लाख रुपये की तुलना में काफी कम है।
IAC ने उद्योग और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के अध्ययनों का हवाला देते हुए ऑटो एलपीजी के पर्यावरणीय लाभ बताए हैं।
पेट्रोल वाहनों की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड और कुल हाइड्रोकार्बन का उत्सर्जन लगभग 50 प्रतिशत कम होता है।
नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) का उत्सर्जन भी कम होता है।
वाहन BS-VI उत्सर्जन मानकों के दायरे में काम करते हैं।
IAC का कहना है कि देश में पहले से मौजूद LPG वितरण और रिटेल नेटवर्क का उपयोग ऑटो एलपीजी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।
नए इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक खर्च नहीं करना पड़ेगा।
ऑटो एलपीजी की उपलब्धता तेजी से बढ़ाई जा सकेगी।
संगठन का कहना है कि केवल रेट्रोफिट नीति ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े अन्य पहलुओं को भी एक साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
रेट्रोफिट नियमों को स्पष्ट बनाया जाए।
वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाएं।
ईंधन नीति को ऑटो एलपीजी जैसे विकल्पों के अनुरूप तैयार किया जाए।
IAC के अनुसार, इससे यूज्ड कार बाजार का विस्तार प्रदूषण बढ़ाने के बजाय स्वच्छ और किफायती मोबिलिटी को बढ़ावा दे सकता है।
IAC का मानना है कि स्पष्ट रेट्रोफिट फ्रेमवर्क कई स्तरों पर लाभ पहुंचा सकता है।
पहले से सड़कों पर चल रहे वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी।
शहरी क्षेत्रों की वायु गुणवत्ता में सुधार।
प्रदूषण प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य को लाभ।
स्वच्छ और किफायती परिवहन को बढ़ावा।
इंडियन ऑटो एलपीजी कोएलिशन (IAC) भारत में ऑटो एलपीजी को बढ़ावा देने वाली नोडल संस्था है।
तेल क्षेत्र की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (PSUs)
निजी ऑटो एलपीजी मार्केटिंग कंपनियां
एलपीजी किट सप्लायर
उपकरण निर्माता
वर्ल्ड एलपीजी एसोसिएशन
सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफ़ैक्चरर्स (SIAM)
इसके अलावा IAC कई सरकारी समितियों का भी हिस्सा है, जिनमें शामिल हैं—
सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स टेक्निकल स्टैंडिंग कमेटी
स्टैंडिंग कमेटी ऑन एमिशन लेजिसलेशन
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की TED26 समिति
IAC का मानना है कि अगर भारत में समयबद्ध और स्पष्ट ऑटो एलपीजी रेट्रोफिट नीति लागू होती है। तो तेजी से बढ़ते यूज्ड कार बाजार को प्रदूषण बढ़ाने के बजाय स्वच्छ, किफायती और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन के अवसर में बदला जा सकता है। साथ ही, पहले से सड़कों पर चल रहे लाखों पेट्रोल और डीजल वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने की दिशा में भी यह एक तत्काल और बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकने वाला समाधान साबित हो सकता है।