देश में दोपहिया एम्बुलेंस के लिए नए नियमों की आवश्यकता क्यों पड़ी?
वर्तमान में देश में दोपहिया एम्बुलेंस को लेकर एक समर्पित नियामक ढांचे का अभाव था।
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श्रेणीबद्ध पहचान की कमी:
मौजूदा समय में केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत इन दोपहिया वाहनों को एक अलग श्रेणी के रूप में मान्यता नहीं प्राप्त थी।
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मानकों का अभाव:
राष्ट्रीय स्तर पर इनके डिजाइन, सुरक्षा मानकों, पंजीकरण, प्रकार की स्वीकृति और फिटनेस जांच से जुड़े निर्धारित नियमों और दिशानिर्देशों की कमी थी।
इसी कमी को दूर करने के लिए सरकार ने नए नियम बनाने का फैसला किया है, जिससे संकरे रास्तों और कठिन इलाकों में आपातकालीन प्रतिक्रिया समय को बेहतर बनाया जा सके।
दोपहिया एम्बुलेंस के निर्माण और सुरक्षा के लिए कौन-से नए तकनीकी मानक तय किए गए हैं?
दोपहिया एम्बुलेंस की सुरक्षा, बनावट और कार्यप्रणाली को मानकीकृत करने के लिए मंत्रालय ने एआईएस-209 (पार्ट 1):2026 नाम का एक नया मानक अपनाने का प्रस्ताव रखा है।
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निर्माण और कार्यात्मक आवश्यकताएं:
यह नया मानक जीवन रक्षक दोपहिया एम्बुलेंस के निर्माण और उनकी कार्यात्मक जरूरतों के नियम तय करता है।
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अनिवार्य अनुपालन की तिथि:
1 अक्तूबर 2027 या उसके बाद निर्मित होने वाली एल-2 श्रेणी की सभी दोपहिया एम्बुलेंस के लिए एआईएस-209 (पार्ट 1):2026 के प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा।
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इमरजेंसी वार्निंग लाइट मानक:
इन वाहनों पर लगने वाली शीर्ष आपातकालीन चेतावनी लाइटों को भी 1 अक्तूबर 2027 से निर्धारित मानकों के अनुरूप बनाना अनिवार्य किया जाएगा।
राज्यों को दोपहिया एम्बुलेंस के संचालन में क्या अधिकार और स्वतंत्रता दी जाएगी?
प्रस्तावित नियमों के तहत राज्य सरकारों को इन एम्बुलेंसों के संचालन क्षेत्र तय करने की पूरी लचीलापन और स्वतंत्रता दी जाएगी।
दोपहिया एम्बुलेंस के पंजीकरण और फिटनेस जांच को लेकर क्या नियम तय किए गए हैं?
मंत्रालय ने दोपहिया एम्बुलेंस को 'परिवहन वाहन' (कमर्शियल/ट्रांसपोर्ट व्हीकल) के रूप में वर्गीकृत करने का प्रस्ताव दिया है।
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अनिवार्य फिटनेस प्रमाण पत्र:
परिवहन वाहन की श्रेणी में आने के कारण इनके लिए फिटनेस प्रमाण पत्र हासिल करना अनिवार्य होगा।
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नवीनीकरण की अवधि:
इन दोपहिया एम्बुलेंस के फिटनेस प्रमाण पत्र का हर दो साल में नवीनीकरण कराना आवश्यक होगा।