क्या हैं पर्यावरण मंत्रालय के नए ELV और EPR नियम?
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जनवरी 2025 में 'पर्यावरण संरक्षण (एंड-ऑफ़-लाइफ़ व्हीकल) नियम, 2025' अधिसूचित किए थे, जो 1 अप्रैल, 2025 से प्रभावी हुए:
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EPR दायित्व: वाहन निर्माताओं को विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) के तहत एक निश्चित वजन के बराबर स्टील को पुराने वाहनों से रिकवर करना अनिवार्य है।
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नियम में बदलाव: 27 मार्च, 2026 को जारी एक संशोधन में मंत्रालय ने 'अन्य स्टील स्क्रैप सामग्री' के उपयोग को प्रमाणपत्र (EPR Certificate) जारी करने की सूची से हटा दिया। अब केवल पुराने वाहनों से निकले स्टील को ही मान्यता दी जा रही है।
वित्त वर्ष 2026 के लिए क्या लक्ष्य रखे गए थे?
नियमों के अनुसार, कंपनियों को घरेलू बाजार में बेचे गए पुराने वाहनों को कबाड़ करना था:
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समय सीमा: निजी वाहनों के लिए 20 साल और वाणिज्यिक (कमर्शियल) वाहनों के लिए 15 साल की सीमा तय की गई।
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टारगेट: निर्माताओं को FY2005-06 (निजी) और FY2010-11 (कमर्शियल) में बेचे गए वाहनों के कुल स्टील वजन के कम से कम 8 प्रतिशत के बराबर स्क्रैपिंग करनी थी।
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आंकड़े: इस लक्ष्य के तहत लगभग 95.2 लाख वाहन फिटनेस टेस्ट के योग्य थे, जिनमें से 7.62 लाख वाहनों को स्क्रैप किया जाना अनिवार्य था।
लक्ष्य हासिल करने में ऑटो इंडस्ट्री क्यों फेल रही?
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वास्तविक स्थिति लक्ष्य से कोसों दूर रही:
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भारी कमी: FY26 में स्क्रैपेज सेंटरों पर केवल 2.42 लाख पुराने वाहन पहुंचे, जिससे 5.2 लाख वाहनों की भारी कमी रह गई।
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संशोधन का असर: उद्योगों ने योजना बनाई थी कि वे अन्य स्रोतों से मिले स्टील स्क्रैप से लक्ष्य पूरा कर लेंगे। लेकिन मार्च 2026 में इस विकल्प को हटा दिए जाने से लक्ष्य पूरा करना लगभग 'असंभव' हो गया।
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वाहनों की अनुपलब्धता: अधिकारियों का कहना है कि स्क्रैपिंग केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में पुरानी गाड़ियां (ELV) आ ही नहीं रही हैं।
SIAM और उद्योग जगत ने सरकार से क्या मांग की है?
वाहन निर्माताओं के संगठन सियाम (SIAM) ने मंत्रालय को पत्र लिखकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं:
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अन्य स्रोतों की अनुमति: सियाम ने मांग की है कि शुरुआती वर्षों में 'अन्य ऑटोमोटिव स्टील स्क्रैप' के उपयोग की अनुमति दी जाए। जब तक कि देश में ELV इकोसिस्टम पूरी तरह विकसित न हो जाए।
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स्वचालित परीक्षण केंद्र (ATS): यह भी बताया गया कि ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन बहुत कम संख्या में पुराने वाहन जेनरेट कर रहे हैं।
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भविष्य का संकट: यदि नियमों पर दोबारा विचार नहीं किया गया, तो संकट और बढ़ेगा। 8 प्रतिशत का यह लक्ष्य 2029-30 तक जारी रहेगा, जिसके बाद यह 13 प्रतिशत और फिर 2035-36 से 18 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा।
ऑटो सेक्टर के अधिकारियों का मानना है कि हर पांच साल के चक्र के बाद यह कमी और बढ़ती जाएगी। नीति में लचीलापन न होने और पुराने वाहनों की कम उपलब्धता ने पूरे उद्योग को डिफॉल्टर होने की कगार पर खड़ा कर दिया है। नीति की समीक्षा ही इस समस्या का एकमात्र समाधान नजर आती है।