फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Auto Component Sector: पार्ट्स महंगे और ग्लोबल सप्लाई में दिक्कत, फिर भी कैसे मजबूत है भारत का ऑटो बाजार?

Wed, 03 Jun 2026 04:58 PM IST
Suyash Pandey ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Auto Component Industry: क्या वैश्विक तनाव का असर भारत के ऑटो सेक्टर पर पड़ेगा? कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने गाड़ियों के पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों का खर्च बढ़ा दिया है। लेकिन बाजार में नई कारों, प्रीमियम बाइक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की भारी डिमांड के चलते इन कंपनियों की कमाई पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। 
विज्ञापन
पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ी, लेकिन कमाई रहेगी मजबूत (एआई) - फोटो : एआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी दिखने लगा है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (Crisil) की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल भारत में गाड़ियों के पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों के मुनाफे के मार्जिन में हल्की गिरावट आ सकती है। हालांकि, ग्राहकों की तरफ से गाड़ियों की जबरदस्त मांग इस सेक्टर को बड़ी राहत दे रही है। 

विज्ञापन

क्यों बढ़ रहा है कंपनियों का खर्च?

रिपोर्ट के अनुसार, गाड़ियां बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ गया है।

  • कच्चा माल हुआ महंगा: स्टील और एल्युमिनियम जैसे कच्चे माल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जो कंपनियों के कुल इनपुट खर्च का 50-60% हिस्सा होते हैं।
  • मार्जिन में आएगी कमी: बढ़ती लागत के कारण कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन (मुनाफे के प्रतिशत) में 1% से 1.5% तक की कमी आ सकती है, जो पिछले साल 12% था।


कंपनियों को स्टॉक करना पड़ रहा है ज्यादा सामान

ग्लोबल सप्लाई चेन बिगड़ने और ट्रांसपोर्टेशन में ज्यादा समय लगने के कारण, निर्माता कंपनियां अब ज्यादा कच्चा माल अपने गोदामों में रख रही हैं ताकि प्रोडक्शन न रुके। पहले जहां 80-85 दिनों का बफर स्टॉक रखा जाता था।

विज्ञापन


वहीं अब सुरक्षा के लिहाज से इसे 15-20 दिन और बढ़ाया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जो बड़ी कंपनियां हैं, वे इस अतिरिक्त स्टॉक के बोझ को आसानी से उठा लेंगी क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति ज्यादा मजबूत है।


गाड़ियों की मांग में है तेजी

लागत बढ़ने के बावजूद, गाड़ियों के पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों की कुल कमाई स्थिर रहने की उम्मीद है। इसका सबसे बड़ा कारण है बाजार में गाड़ियों की तेज मांग। इसके पीछे ये मुख्य कारण हैं:

  • लगातार लॉन्च हो रहे नए मॉडल।
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास से कमर्शियल वाहनों (ट्रक, डंपर आदि) की बढ़ती मांग।
  • प्रीमियम (महंगे और दमदार) टू-व्हीलर्स का बढ़ता क्रेज।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को लोग तेजी से अपना रहे हैं।


सेक्टर की कमाई का हिसाब-किताब

लगभग 9 लाख करोड़ रुपये वाले इस ऑटो कंपोनेंट सेक्टर की कमाई मुख्य रूप से तीन जगह से आती है:

  • वाहन निर्माता कंपनियां (OEMs): इस सेक्टर की कुल कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा (लगभग दो-तिहाई) कार और बाइक बनाने वाली कंपनियों से आता है।
  • निर्यात: भारत के ऑटो पार्ट्स की मांग विदेशों में भी है। कुल कमाई में इसका हिस्सा 16% है। अमेरिका में टैरिफ सुधरने के कारण इस साल निर्यात में 8-9% की ग्रोथ की उम्मीद है।
  • आफ्टरमार्केट (सर्विस और स्पेयर पार्ट्स): पिछले कुछ वर्षों में बहुत सी गाड़ियां बिकी हैं, इसलिए उनके स्पेयर पार्ट्स का बाजार एकदम स्थिर है। यह कुल कमाई का 12% हिस्सा है।

विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें