पेट्रोल-डीजल की महंगाई और धुएं से होने वाले प्रदूषण से पार पाने के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने 'केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989' में संशोधन का एक ड्राफ्ट जारी किया है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के इस नए ड्राफ्ट की सबसे बड़ी खासियत E85 और E100 जैसे आधुनिक फ्यूल को शामिल करना है। E85 फ्यूल का अर्थ है एक ऐसा मिश्रण जिसमें 85% एथेनॉल और सिर्फ 15% पेट्रोल होगा, जो प्रदूषण को काफी हद तक कम कर देगा। वहीं, भविष्य की सबसे बड़ी तैयारी E100 फ्यूल को लेकर है, जिसका सीधा मतलब 100% शुद्ध एथेनॉल है। यानी आने वाले समय में हमारी गाड़ियां पेट्रोल की एक भी बूंद के बिना, पूरी तरह से एथेनॉल पर फर्राटे भरने में सक्षम होंगी। ये बदलाव न केवल पर्यावरण के लिए गेम-चेंजर साबित होंगे, बल्कि ईंधन के विकल्पों में भी एक नई क्रांति लाएंगे।
भारत ने साल 2025 में ही पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने (E20) का बड़ा लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है, लेकिन सरकार अब यहीं रुकने वाली नहीं है। विदेशों से खरीदे जाने वाले महंगे कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के लिए अब इसे अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी है। हाल ही में 'ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉन्क्लेव' के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस विजन को स्पष्ट करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए भारत को एनर्जी सेक्टर में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनना ही होगा।
उनका लक्ष्य है कि भारत जल्द से जल्द 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग के मुकाम को छुए। साथ ही, उन्होंने वाहन निर्माताओं और ग्राहकों को भरोसा दिलाया कि अगले साल यानी 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले सख्त CAFE III (कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी) मानकों का इलेक्ट्रिक और फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा, बल्कि ये तकनीकें भारत के टिकाऊ भविष्य का आधार बनेंगी।
क्लीन फ्यूल की यह मुहिम अब सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि आसमान में उड़ने वाले विमानों के लिए भी सरकार ने एक एतिहासिक कदम उठाया है। इसी महीने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने एक महत्वपूर्ण नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत अब एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF), यानी हवाई जहाजों के ईंधन में भी एथेनॉल और सिंथेटिक हाइड्रोकार्बन मिलाने की आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है।
हालांकि, फिलहाल एयरलाइंस के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग का कोई अनिवार्य टारगेट तय नहीं किया गया है, लेकिन नियमों के दायरे को बढ़ाकर इसके रास्ते खोल दिए गए हैं। इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा भविष्य में कार्बन उत्सर्जन को घटाने और कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता को कम करने में मिलेगा।
इस बड़े बदलाव के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता को खत्म करना है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी अक्सर इस बात पर जोर देते रहे हैं कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की जरूरत है। 100% एथेनॉल के इस्तेमाल से न केवल आम आदमी के पैसे की बचत होगी, बल्कि वाहनों से होने वाला प्रदूषण भी काफी हद तक कम हो जाएगा।
भारत इस मामले में ब्राजील जैसे देशों से प्रेरणा ले रहा है, जहां पहले से ही बड़े पैमाने पर एथेनॉल का सफल इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इस मॉडल को अपनाकर देश न केवल स्वच्छ ईंधन की ओर बढ़ेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति की अनिश्चितताओं से भी खुद को सुरक्षित कर सकेगा।
क्लीन फ्यूल की यह मुहिम सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब भारतीय आसमान में भी इसका असर दिखाई देगा। सरकार ने हवाई जहाजों के ईंधन (ATF) में एथेनॉल मिलाने की मंजूरी देकर एविएशन सेक्टर में एक बड़े बदलाव की नींव रख दी है। इसके साथ ही, कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए 'सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल' (SAF) के मिश्रण का एक स्पष्ट रोडमैप भी तैयार किया गया है।
भारत ने लक्ष्य रखा है कि साल 2027 तक 1%, 2028 तक 2% और 2030 तक इसे बढ़ाकर 5% तक ले जाया जाएगा। इस कदम से न केवल विमानों से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता भी काफी कम होगी।
सरकार ने इस नए ड्राफ्ट को पब्लिक डोमेन में जारी कर दिया है। अगर आपको इस पर कोई आपत्ति है या आप कोई सुझाव देना चाहते हैं तो अगले 30 दिनों के भीतर अपनी राय सरकार तक पहुंचा सकते हैं। इसके बाद ही इन नियमों को फाइनल किया जाएगा।