सैन फ्रांसिस्को में आयोजित एक भव्य इवेंट में, ग्लोबल प्रीमियम ईवी ब्रांड Dreame Nebula NEXT ने अपनी एक शानदार हाइपरकार पेश करके ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया है। इस कार का नाम 'Nebula NEXT 01 Concept Jet Edition' है। आपको बता दें कि ड्रीमी मुख्य रूप से अपने रोबोट वैक्यूम क्लीनर और घरेलू उपकरणों के लिए जानी जाती है। इसकी कार सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें रॉकेट इंजन और इलेक्ट्रिक (ईवी) इंजन, दोनों का बेहतरीन कॉम्बिनेशन दिया गया है। 'DRIVE NEXT: ट्रांसफॉर्मेशन से ट्रांसपोर्टेशन तक' थीम वाले इस इवेंट में कंपनी ने न सिर्फ गाड़ियां, बल्कि कई स्मार्ट होम अप्लायंसेज और बेहतरीन रोबोट वैक्यूम भी पेश किए।
इस कार की सबसे बड़ी चर्चा इसकी स्पीड को लेकर है। कंपनी का दावा है कि यह मात्र 0.9 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है। शुरुआत में यह दावा नामुमकिन सा लगता है। समस्या यह है कि आज की सबसे बेहतरीन और तेज कारों के टायर भी इतनी तेज शुरुआत के लिए सड़क पर जरूरी ग्रिप नहीं बना पाते। इसका मतलब है कि सिर्फ इंजन की पावर बढ़ाने से कुछ नहीं होगा, क्योंकि टायर ही आपको पीछे खींचेंगे।
चूंकि महज टायरों के घर्षण और सड़क पर उनकी पकड़ के भरोसे ऐसी अविश्वसनीय रफ्तार हासिल करना मुमकिन नहीं था, इसलिए Dreame ने इंजीनियरिंग का एक बिल्कुल अनोखा और क्रांतिकारी रास्ता चुना है। अपनी नई कार 'Dreame Nebula NEXT 01 Jet Edition' में कंपनी ने पारंपरिक सिस्टम के साथ-साथ 'कस्टम-बिल्ट डुअल सॉलिड रॉकेट बूस्टर' का इस्तेमाल किया है। ये बूस्टर मात्र 150 मिलीसेकंड में सक्रिय होकर 100 किलो-न्यूटन का जबरदस्त थ्रस्ट पैदा करते हैं।
यह क्रांतिकारी जेट सिस्टम कंपनी की पहले से चर्चित 'Dreame Nebula 1' कॉन्सेप्ट कार के प्लेटफार्म पर आधारित है। 1,876 हॉर्सपावर (hp) की भारी-भरकम ताकत वाली इस सुपरकार की पहली झलक दुनिया ने इसी साल CES इवेंट में देखी थी, जहां इसके डिजाइन ने सबको हैरान कर दिया था।
सिर्फ रफ्तार ही नहीं, यह कार तकनीक के मामले में भी उतनी ही एडवांस है। इसे ऑटोनोमस (सेल्फ-ड्राइविंग) क्षमताओं से लैस करने के लिए इसमें हाई-रेजोल्यूशन LiDAR सेंसर दिए गए हैं, जो इसे सड़क पर खुद चलने और खतरों को भांपने में सक्षम बनाते हैं।
रफ्तार के शौकीनों को इस 'दुनिया की सबसे तेज कार' के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। कंपनी का लक्ष्य 2027 से इसका बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन शुरू करने का है। इसके निर्माण के लिए Dreame ने BNP Paribas के साथ हाथ मिलाया है और जर्मनी के बर्लिन शहर के बाहर एक अत्याधुनिक फैक्ट्री लगाने की योजना बनाई है। दिलचस्प बात यह है कि इसी प्लांट में कंपनी अपनी एक अपकमिंग लग्जरी एसयूवी भी बनाएगी। इसकी तुलना अभी से दिग्गज 'Rolls Royce Cullinan' के लुक्स से की जा रही है।
Dreame की यह हाइपरकार काफी हद तक एलन मस्क की बहुप्रतीक्षित 'Tesla Roadster' की याद दिलाती है। गौरतलब है कि साल 2017 में टेस्ला ने भी एक ऐसी कार का दावा किया था जो मात्र 1.1 सेकंड में 0-60 mph (100 kmph) की रफ्तार पकड़ सके। मस्क ने इसमें 'स्पेसएक्स पैकेज' (कोल्ड एयर थ्रस्टर्स) देने की बात कही थी, जो रॉकेट जैसी ताकत के साथ कार को एक्सीलरेट करेगा।
हालांकि दोनों कंपनियां रॉकेट तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं, लेकिन इनके काम करने के तरीके में बड़ा अंतर है:
ईंधन: टेस्ला के थ्रस्टर्स कंप्रेस्ड हवा पर काम करेंगे, जिसे भरना और मैनेज करना तुलनात्मक रूप से आसान है। इसके विपरीत, Dreame की कार के लिए 'सॉलिड रॉकेट फ्यूल' की जरूरत होगी, जिसे जुटाना और रिफिल करना आम आदमी के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकता है।
पर्यावरण पर असर: जहां टेस्ला की तकनीक हवा का उपयोग करती है, वहीं Dreame के सॉलिड रॉकेट बूस्टर चलते समय धुआं और गैसें छोड़ेंगे। इसका मतलब है कि बूस्टर के इस्तेमाल के दौरान यह कार पूरी तरह एमिशन-फ्री (प्रदूषण मुक्त) नहीं रहेगी, जो एक इलेक्ट्रिक कार के लिए थोड़ा विरोधाभासी है।
भले ही कंपनी ने अभी इसके पेचीदा तकनीकी सवालों पर पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है, लेकिन चीनी ईवी मार्केट के मौजूदा ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए इसे महज 'हवा-हवाई' दावा कहना गलत होगा। हाल ही में हमने देखा है कि कैसे Xiaomi जैसी कंपनियों ने मोबाइल फोन से सीधे ऑटोमोबाइल मार्केट में उतरकर सबको चौंका दिया है। इस वक्त चीन की ईवी इंडस्ट्री जिस रफ्तार और आक्रामकता से काम कर रही है, उसने पूरी दुनिया को पीछे छोड़ दिया है।