देश में इस समय कितनी अर्बन बसें चल रही हैं और क्या हैं सरकार के मानक?
अध्ययन के मुताबिक, भारत की शहरी बस प्रणाली आबादी की जरूरतों के मुकाबले काफी पीछे है:
- बसों की संख्या: देश में कुल 14.5 लाख पंजीकृत बसों और राज्य परिवहन उपक्रमों (STUs) की 2.9 लाख बसों में से केवल 65,000 बसें ही संगठित शहरी सिटी बसों के रूप में संचालित हो रही हैं।
- प्रति लाख आबादी पर उपलब्धता: वर्तमान में प्रति एक लाख शहरी आबादी पर केवल 13.3 से 13.8 बसें उपलब्ध हैं। जबकि सरकार का न्यूनतम मानक प्रति लाख आबादी पर 44 बसों का है।
- बढ़ती आबादी की चुनौती: वित्तीय वर्ष 2026 में भारत की शहरी आबादी 49 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2047 तक 76.3 करोड़ (763 मिलियन) होने का अनुमान है। यानी शहरों में 27 करोड़ नए नागरिक जुड़ेंगे, जिससे यह संकट और गहरा हो सकता है।
राज्यों में बसों का वितरण कैसा है और पुरानी बसों से क्या नुकसान हो रहा है?
रिपोर्ट में देश के भीतर बसों के असमान वितरण और पुरानी होती गाड़ियों की समस्या पर भी रोशनी डाली गई है:
- 5 राज्यों में 55% बसें: देश की सक्रिय बसों का आधे से अधिक (55 प्रतिशत) हिस्सा केवल 5 राज्यों- मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में केंद्रित है।
- पुरानी बसों का बोझ: वर्तमान में सड़कों पर दौड़ रही 40,000 शहरी बसें अपनी 15 साल की वैधानिक आयु सीमा पार कर चुकी हैं। ये पुरानी बसें 20 से 30 प्रतिशत अधिक ईंधन खपत करती हैं। और इनकी रखरखाव लागत 15 रुपये से 20 रुपये प्रति किलोमीटर आती है।
- स्क्रैपेज का आंकड़ा: 2026 से 2030 के बीच देश भर में सभी श्रेणियों की रिकॉर्ड 5.8 लाख बसें अपनी जीवन अवधि पूरी कर लेंगी।
वर्ष 2047 तक भारत को कितने बजट और कितनी नई बसों की आवश्यकता होगी?
'विकसित भारत 2047' के तहत वैश्विक मानकों (प्रति लाख आबादी पर 88 बसें) को हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता होगी:
- 6.71 लाख बसों का बेड़ा: वर्ष 2047 तक देश में 6.71 लाख सक्रिय बसों का परिचालन बेड़ा (जिसमें 90 प्रतिशत इलेक्ट्रिक बसें होंगी) तैयार करने के लिए कुल 9.1 लाख नई बसों की खरीद करनी होगी।
- ₹14.20 लाख करोड़ का खर्च: इस विशाल लक्ष्य को पूरा करने के लिए कुल 14.20 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय की जरूरत होगी।
- खरीद में 17 गुना बढ़ोतरी: भारत को बसों की वार्षिक खरीद दर 2,500 बसों से बढ़ाकर औसतन 41,500 बसें प्रति वर्ष (17 गुना वृद्धि) करनी होगी।
DEVI Bus Scheme in Delhi
- फोटो : Amar Ujala
इलेक्ट्रिक बसों के बड़े बेड़े को चलाने के लिए कितनी बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए?
अध्ययन में सिफारिश की गई है कि वित्तीय वर्ष 2039-40 तक नई बसों की खरीद में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की होनी चाहिए:
- ई-बसों की संख्या: इससे 2047 तक सड़कों पर 6.04 लाख इलेक्ट्रिक अर्बन बसें चालू स्थिति में होंगी।
- बिजली की मांग: इस शून्य-उत्सर्जन बेड़े को चलाने के लिए 121 GWh की एक्टिव बैटरी क्षमता और सालाना लगभग 37,000 मिलियन यूनिट (MU) बिजली की आवश्यकता होगी। जो भारत के कुल वार्षिक बिजली उत्पादन का मात्र 1.8 प्रतिशत है।
सरकार की वर्तमान 'पीएम ई-बस' और 'पीएम ई-ड्राइव' योजनाओं की स्थिति क्या है?
केंद्र सरकार ने शहरों में ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए कई प्रमुख पहल शुरू की हैं:
- PM e-Bus Sewa (2023-27): 20,000 करोड़ रुपये के समर्पित बजट के साथ छोटे और मध्यम शहरों को लक्षित करते हुए 10,000 ई-बसों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 2026 की शुरुआत तक लगभग 5,000 बसें डिलीवर की जा चुकी हैं।
- PM e-Drive Scheme: बड़े महानगरों पर ध्यान केंद्रित करते हुए 4,391 करोड़ रुपये के बजट के साथ 14,028 ई-बसों को मंजूरी दी गई है।
- पुराने फेम (FAME) चरण: FAME-I योजना के तहत पायलट आधार पर 425 बसें जोड़ी गई थीं। जबकि FAME-II के तहत मंजूर 6,862 बसों में से लगभग 5,135 बसें सड़कों पर उतारी गईं।