भारत क्यों घटाना चाहता है टैक्स?
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत इस टैरिफ के असर को कम करने के लिए अमेरिकी ऑटो पार्ट्स पर लगने वाले 10-15 प्रतिशत के कस्टम ड्यूटी को घटाने या खत्म करने पर विचार कर रहा है।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी ऑटो पार्ट्स पर टैक्स घटाने से भारतीय ऑटो उद्योग को कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा। इसके पीछे यह सोच है कि महंगे अमेरिकी ऑटो पार्ट्स, भारत में बने सस्ते ऑटो पार्ट्स की जगह नहीं ले पाएंगे, भले ही उन पर से टैक्स हटा दिया जाए।
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व्यापार में संतुलन बनाने की कोशिश
यह कदम भारत की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें भारत उन उत्पादों पर टैक्स कम करने पर विचार कर रहा है जिनका भारत अमेरिका को बड़ी मात्रा में निर्यात करता है, लेकिन जिनका खुद ज्यादा आयात नहीं करता।
वित्त वर्ष 2024 में, भारत ने अमेरिका को करीब 7 अरब डॉलर के ऑटो पार्ट्स निर्यात किए थे, जबकि अमेरिका से सिर्फ 1.5 अरब डॉलर के ऑटो पार्ट्स आयात किए थे। ऐसे में, अमेरिकी ऑटो पार्ट्स पर ड्यूटी खत्म करने से भारत को ज्यादा नुकसान नहीं होगा।
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व्हाइट हाउस और भारत के बीच बातचीत जारी
रिपोर्ट के मुताबिक, अभी तक भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच सिर्फ ऑटो पार्ट्स को लेकर चर्चा हुई है, पूरी गाड़ियों को लेकर नहीं। दोनों देश इस समय आपसी व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कर रहे हैं, ताकि ट्रंप की टैरिफ नीति से बीच का कोई रास्ता निकाला जा सके।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने अमेरिका को साफ तौर पर कहा है कि व्यापार से जुड़ी बाकी समस्याओं का समाधान व्यापार समझौते के जरिए किया जाना चाहिए, न कि टैरिफ के जरिए।
एक सूत्र ने बताया कि भारत ने अमेरिका से कहा है कि जब दोनों देश व्यापार को लेकर बातचीत कर रहे हैं, तो 2 अप्रैल से शुरू होने वाले जवाबी टैरिफ (रिसीप्रोकल टैरिफ) लगाने की कोई जरूरत नहीं है।
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