अगर आप नहीं जानते कि एयरबैग्स किस तरह से काम करते हैं तो आपको बता दें कि एयरबैग्स ऑन बोर्ड सेंसर तकनीक पर काम करते हैं। ऐसे में कार की किसी भी तरह की टक्कर पर यह सेंसर एययरबैग्स को एक्टिव कर देते हैं। एयरबैग्स एक्टिव होने के बाद इसमें एक छोटा डिवाइस होता है, जो कि एयरबैग्स में हवा भरने का काम करता है। कोई टक्कर होने पर गाड़ी में बैठे लोग इस एयरबैग्स से टकराते हैं और किसी तरह की चोट लगने की संभावना कम हो जाती है।
कार जब भी किसी दुर्घटना में टकराती है तो एयरबैग्स में मौजूद डिवाइस एयरबैग्स में हवा भरने का काम शुरू कर देता है। इस दौरान एक तेज आवाज भी आती है, मगर कार में बैठे लोगों को यह आवाज सुनाई नहीं देती है, क्योंकि उनका ध्यान कार की टक्कर पर होता है। एयरबैग्स फूलने के बाद वह एक नरम तकिए की तरह हो जाता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कार में सुरक्षा के लिए मिलने वाला एयरबैग तभी काम करता है, जब गाड़ी में बैठे व्यक्ति ने सीट बेल्ट पहनी हो। अगर कार में बैठने वाले शख्स ने सीट बेल्ट नहीं पहनी है तो एयरबैग्स उस व्यक्ति की सही से खोज नहीं कर पाता है। इसका नतीजा यह होता है कि हादसा होने पर उस व्यक्ति को एयरबैग की सुरक्षा नहीं मिल पाती है और गंभीर चोट लगने का खतरा बना रहता है। ऐसे में कार में हमेशा सीट बेल्ट का इस्तेमाल करें, ताकि एयरबैग्स अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर सकें।
कार निर्माता आजकल की कारों में 6 से 7 एयरबैग्स यात्रियों की सुरक्षा के लिए दे रहे हैं। यह एयरबैग्स सवारियों को टक्कर की स्थिति में हर तरफ से कवर कर लेते हैं। इन एयरबैग्स की वजह से कार में बैठे व्यक्ति का सिर खासतौर पर सुरक्षित हो जाता है।