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'E10 पेट्रोल उपलब्ध हो': PM मोदी के आर्थिक सलाहकार ने क्यों की ये मांग, E20 ईंधन से हो रहे नुकसान पर क्या बोले

Mon, 17 Aug 2026 02:02 PM IST
रिया दुबे ऑटो डेस्क, अमर उजाला

सार

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने पुराने वाहनों को देखते हुए ई20 के साथ ई10 पेट्रोल फिर से उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि इससे पुराने, खासकर कार्ब्यूरेटर वाले दोपहिया वाहनों को संभावित नुकसान से बचाने और ई20 को लेकर लोगों की चिंताएं कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने फिलहाल ई20 से आगे मिश्रण बढ़ाने से पहले लागत-लाभ विश्लेषण की भी बात कही है।
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भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने देश में बड़ी संख्या में चल रहे पुराने वाहनों को देखते हुए ई20 के साथ ई10 पेट्रोल की उपलब्धता फिर शुरू करने का सुझाव दिया है। उनका मानना है कि इससे खासकर पुराने दोपहिया वाहनों के इंजन पर एथेनॉल मिश्रित ईंधन के संभावित असर को कम किया जा सकेगा और लोगों की ई20 पेट्रोल को लेकर बनी चिंताएं भी दूर होंगी।

दावों को लेकर क्या बोले?

द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक लेख में नागेश्वरन ने कहा कि ई20 पेट्रोल से वाहनों के इंजन को व्यापक नुकसान पहुंचने की आशंकाओं का समर्थन उपलब्ध वैज्ञानिक और परीक्षण संबंधी प्रमाण नहीं करते। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर ई20 को लेकर कई दावे किए गए हैं, लेकिन वास्तविक आंकड़े उनसे काफी अलग हैं।

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नागेश्वरन के अनुसार, एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में लगभग दो-तिहाई ऊर्जा सामग्री होती है। इस कारण ई20 पेट्रोल के उपयोग से ईंधन दक्षता पर कुछ असर पड़ता है, लेकिन यह प्रभाव लगभग 7 प्रतिशत तक सीमित है, न कि उतना अधिक जितना कई मंचों पर दावा किया जाता है।

पुराने दोपहिया वाहन को लेकर जताई चिंता

उन्होंने बताया कि अमेरिका और भारत में किए गए परीक्षणों में यह नहीं पाया गया कि ई20 के लिए प्रमाणित नहीं किए गए वाहनों में इंजन घिसाव या यांत्रिक क्षति में कोई उल्लेखनीय वृद्धि हुई हो। हालांकि, उन्होंने एक वास्तविक चिंता की ओर ध्यान आकर्षित किया। उनके अनुसार, भारत में करीब 7.5 से 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहन अभी भी चलन में हैं, जिन्हें बीएस-IV मानकों से पहले बनाया गया था और जिनमें कार्ब्यूरेटर तकनीक का उपयोग होता है।

कार्ब्यूरेटर के लिए कैसे नुकसान दायक है ई20?

नागेश्वरन ने कहा कि कार्ब्यूरेटर अतिरिक्त ऑक्सीजन वाली एथेनॉल मिश्रित ईंधन संरचना के अनुसार, खुद को समायोजित नहीं कर पाता। परिणामस्वरूप ई20 का उपयोग करने पर इंजन को आवश्यक अनुपात में ईंधन नहीं मिल पाता और वह अपेक्षाकृत अधिक गर्म होकर चल सकता है। इसके अलावा पुराने वाहनों में लगे कुछ रबर सील और पुर्जे एथेनॉल के लंबे संपर्क में आने पर प्रभावित हो सकते हैं। दरअसल, कार्ब्यूरेटर पेट्रोल इंजन का एक मुख्य यंत्र है।

उन्होंने कहा कि सरकार के मूल एथेनॉल मिश्रण रोडमैप में यह अनुमान लगाया गया था कि पुराने वाहनों के लिए कम मिश्रण वाला ईंधन उपलब्ध रखा जाएगा। लेकिन समय के साथ यह विकल्प अधिकांश पेट्रोल पंपों से लगभग समाप्त हो गया।

ई10 पेट्रोल के विकल्प पर दिया जोर

अपने लेख में नागेश्वरन ने लिखा, "पेट्रोल पंपों पर ई20 के साथ ई10 पेट्रोल का विकल्प दोबारा उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इससे लोगों की चिंताएं कम होंगी, पुराने वाहन बेड़े को सुरक्षा मिलेगी और रेट्रोफिटिंग कार्यक्रम को लागू करने के लिए पर्याप्त समय भी मिलेगा।"

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उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल भारत को ई20 स्तर पर ही स्थिर रहना चाहिए और उससे आगे एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से पहले विस्तृत लागत-लाभ विश्लेषण किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इस मूल्यांकन में खाद्यान्न बनाम ईंधन बहस, जल उपयोग, मूल्य निर्धारण और खाद्य तेल नीति से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया जाना चाहिए।

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