गाड़ियों की कीमतें होंगी कम
सबसे बड़ा असर दोपहिया वाहनों, छोटी कारों, ट्रैक्टरों, बसों और ट्रकों की कीमतों में कमी के रूप में दिखेगा। कीमतें घटने से मांग बढ़ेगी, जिससे मैन्युफैक्चरिंग, सेल्स, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, एनबीएफसी, बैंकों और फिनटेक कंपनियों के जरिए कर्ज पर वाहन खरीद और आसान होगी।
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3.5 करोड़ नौकरियों पर असर
जीएसटी सुधार से ऑटो और इससे जुड़ी इंडस्ट्री में 3.5 करोड़ से ज्यादा नौकरियों को सपोर्ट मिलेगा। इससे टायर, बैटरी, ग्लास, स्टील, प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे छोटे उद्योगों को भी फायदा होगा। ड्राइवर, मैकेनिक, गिग वर्कर्स और सर्विस सेक्टर में भी रोजगार के मौके बढ़ेंगे।
इसके अलावा, पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की जगह नए, फ्यूल-इफिशिएंट वाहनों को अपनाने का प्रोत्साहन मिलेगा। बसों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे जाम और प्रदूषण कम होगा।
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जीएसटी संरचना हुई आसान
अब तक जीएसटी चार स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) में बंटा था। लेकिन 56वीं जीएसटी काउंसिल बैठक में इसे घटाकर दो मुख्य दरों पर लाया गया है- 5 प्रतिशत (मेरेट रेट) और 18 प्रतिशत (स्टैंडर्ड रेट), जबकि लग्जरी/सिन गुड्स के लिए 40 प्रतिशत की दर तय की गई है।
यह नया ढांचा 22 सितंबर 2025, नवरात्रि के पहले दिन से लागू होगा। इसे सरकार ने नेक्स्ट-जेन जीएसटी रेशनलाइजेशन कहा है। जो नागरिकों का टैक्स बोझ घटाने और अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने के मकसद से लागू किया गया है।
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