क्यों फंसा है कंपेंसेशन सेस का पैसा
ऑटो डीलरों के बही-खातों में मौजूद सेस बैलेंस को नए जीएसटी 2.0 ढांचे में आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। इसी वजह से हजारों MSME (एमएसएमई) डीलरों पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है।
इसी चिंता को लेकर FADA (फाडा) ने अक्तूबर में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। उनका कहना है कि वे सुधारों के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे चाहते हैं कि कर प्रणाली में न्याय और भरोसा बना रहे। अगर क्रेडिट लैप्स हो गया, तो कई डीलरों के लिए यह भारी नुकसान साबित होगा।
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पीएम से भी मांगा गया हस्तक्षेप, उद्योग ने रखीं अतिरिक्त मांगें
ऑटो उद्योग इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिख कर अनुरोध कर चुका है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर डीलरों के हितों की रक्षा करें।
प्री-बजट चर्चा में उद्योग ने सरकार के सामने अन्य मुद्दे भी रखे, जिनमें शामिल हैं:
- जीएसटी पोर्टल की तकनीकी समस्याएं
- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार
- कंप्लायंस प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग
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रिकॉर्ड बिक्री: PV उद्योग ने अक्तूबर 2025 में तोड़ा सभी पिछला रिकॉर्ड
विवादों के बीच भारत के पैसेंजर व्हीकल (PV) उद्योग ने अक्तूबर 2025 में अपनी अब तक की सबसे बड़ी मासिक बिक्री दर्ज की। फेस्टिव सीजन और जीएसटी दरों में हालिया सुधार की वजह से बाजार को बड़ा प्रोत्साहन मिला है।
- अक्तूबर 2025 में PV होलसेल: 4,70,227 यूनिट्स
- साल-दर-साल वृद्धि: 17.23 प्रतिशत
- अक्तूबर 2024: 4,01,105 यूनिट्स
- यह आंकड़ा जनवरी 2025 के 4,05,522 यूनिट्स वाले पिछले रिकॉर्ड को भी पार कर गया
अक्तूबर 2025 का प्रदर्शन भारतीय ऑटो उद्योग के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है।
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