नई आईटी नीति (2025-2030) का हिस्सा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह पहल राज्य की नई आटी पॉलिसी 2025-2030 का हिस्सा है। इस नीति का मकसद बंगलूरू के आसपास उभरते टेक क्लस्टर्स को तेजी से विकसित करना और निवेश को बड़े शहर से बाहर की ओर मोड़ना है।
सरकार ने विस्तार के लिए जिन प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है, उनमें मैसूरू, मंगलूरू, हुब्बली-धारवाड़, कलबुर्गी और शिवमोगा शामिल हैं।
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कौन सी कंपनियां लाभ उठा सकती हैं
- यह इंसेंटिव खासतौर पर उन कंपनियों को दिया जाएगा जो:
- अपना मौजूदा वर्कफोर्स बंगलूरू से इन टियर-2 शहरों में शिफ्ट करें, या
- राज्य के बाहर से नए कर्मचारियों को नियुक्त कर इन्हीं शहरों में संचालन शुरू करें।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य बंगलूरू में बढ़ती आबादी और यातायात के बोझ को कम करना।
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नीति का मूल विचार: निवेश टैलेंट के पीछे नहीं भागेगा
बंगलूरू टेक समिट के दौरान कर्नाटक के आईटी मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा कि अब जरूरत ऐसी नीति की है जिसमें टैलेंट को निवेश के पीछे नहीं भागना पड़े। बल्कि निवेश वहां जाए जहां टैलेंट मौजूद है। यह योजना उसी सोच को मजबूत करती है और छोटे शहरों को बड़े टेक हब्स में बदलने का लक्ष्य रखती है।
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बंगलूरू की गंभीर ट्रैफिक चुनौती
बंगलूरू में वर्तमान वाहन संख्या 1.2 करोड़ तक पहुंच गई है, जिनमें से 82% दोपहिया वाहन हैं। पार्किंग एक बड़ी समस्या बन चुकी है, जिसे हल करने के लिए सरकार ने:
- 1,194 किमी लंबी सड़कों को नो-पार्किंग जोन घोषित करने का फैसला किया है
- वैकल्पिक पार्किंग स्थानों की पहचान कर उन्हें टेंडरों के जरिए मैनेज किया जाएगा
- इससे पार्किंग व्यवस्था सुधरेगी और सरकार को अतिरिक्त राजस्व भी मिलेगा
यह योजना न केवल बंगलूरू के दबाव को कम करेगी, बल्कि कर्नाटक के अन्य शहरों को बड़े टेक केंद्र के रूप में विकसित करने का रास्ता भी बनाएगी।
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