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BS6 Vehicle Emissions: बीएस6 उत्सर्जन परीक्षण में होने वाला है बड़ा बदलाव, जानें इसका आप पर होगा क्या असर?

Tue, 10 Feb 2026 06:42 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत के व्हीकल एमिशन टेस्टिंग सिस्टम में एक जरूरी अपडेट होने वाला है। सरकार ने 1 अप्रैल, 2027 से एक नए टेस्टिंग साइकिल में बदलाव की पुष्टि की है।
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Car Pollution - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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भारत सरकार ने वाहन उत्सर्जन परीक्षण प्रणाली में बड़ा बदलाव करने की घोषणा की है। 1 अप्रैल 2027 से BS6 मानकों के तहत उत्सर्जन जांच के लिए नया वैश्विक परीक्षण तरीका लागू किया जाएगा। जिससे वाहनों के प्रदूषण स्तर को वास्तविक सड़क स्थितियों के अधिक करीब मापा जा सके।
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WLTP परीक्षण पद्धति क्या है?
सरकार ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन करते हुए वर्ल्डवाइड हार्मोनाइज्ड लाइट-ड्यूटी व्हीकल्स टेस्ट प्रोसीजर (WLTP) को अपनाने की अधिसूचना जारी की है। यह वही प्रणाली है जिसे यूरोपीय संघ ने 2018 में लागू किया था। और इसे वास्तविक ड्राइविंग परिस्थितियों के ज्यादा अनुरूप माना जाता है।

 

अभी कौन-सी प्रणाली इस्तेमाल हो रही है?
फिलहाल भारत में मॉडिफाइड इंडियन ड्राइविंग साइकिल (MIDC) के आधार पर ईंधन दक्षता और उत्सर्जन की जांच की जाती है। यह लैब आधारित परीक्षण है, जो वास्तविक ट्रैफिक और ड्राइविंग पैटर्न को पूरी तरह नहीं दर्शाता।

किन वाहनों पर लागू होंगे नए नियम?
नया WLTP-आधारित परीक्षण मुख्य रूप से M1 और M2 श्रेणी के वाहनों पर लागू होगा। इसमें यात्री कारें, एसयूवी, मल्टी-पर्पज वाहन, और 5 टन तक के वाणिज्यिक यात्री बस व वैन शामिल हैं।

 

Car Pollution - फोटो : Freepik
नए नियम कब से लागू होंगे?
सरकार के अनुसार, 1 अप्रैल 2027 से निर्मित सभी नए मॉडल्स पर WLTP आधारित परीक्षण अनिवार्य होगा। उसी तारीख से मौजूदा मॉडल्स को भी इन मानकों के अनुरूप होना पड़ेगा।

परीक्षण कैसे किया जाएगा?
उत्सर्जन जांच चेसिस डायनेमोमीटर पर AIS-175 में निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार की जाएगी। जिन्हें समय-समय पर अपडेट किया जाएगा।

 

BS6 मानकों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
यह बदलाव BS6 उत्सर्जन सीमाओं को नहीं बदलता, बल्कि केवल यह सुनिश्चित करता है कि प्रदूषण का मापन वास्तविक सड़क स्थितियों के अधिक करीब हो। भारत ने BS6 मानक अप्रैल 2020 में पूरे देश में लागू किए थे।

CAFE मानकों पर क्या प्रभाव होगा?
वर्तमान में CAFE (कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी) मानक भी MIDC पर आधारित हैं। ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी ने प्रस्ताव दिया है कि 31 मार्च 2027 से CAFE-III चरण के साथ WLTP को अपनाया जाए।

 
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Car Pollution - फोटो : Adobe Stock
आम उपभोक्ताओं के लिए इसका क्या मतलब है?
इस बदलाव से वाहन निर्माताओं पर अधिक सख्त और वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप उत्सर्जन लक्ष्य पूरे करने का दबाव बढ़ेगा। उपभोक्ताओं को भविष्य में अधिक ईंधन-कुशल और कम प्रदूषण वाले वाहन मिलने की संभावना है। साथ ही लैब और सड़क पर मिलने वाले आंकड़ों के बीच अंतर भी कम होगा। 

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