स्वच्छ भारत मिशन के तहत, सभी टोल प्लाजा के पास पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा, सरकार का लक्ष्य हर 40-60 किलोमीटर पर राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे सुविधाजनक स्थल विकसित करने का है। यह जानकारी ग्रामीण विकास मंत्रालय ने लोकसभा में दी।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को लिखित जवाब में यह बताया। उन्होंने यह जानकारी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से मिली जानकारी के आधार पर दी।
टोल प्लाजा के पास बनाए जा रहे हैं सार्वजनिक शौचालय
मंत्री ने कहा, "राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के टोल प्लाजा के पास सार्वजनिक शौचालय बनाए जा रहे हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की जानकारी के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन के तहत 2015 से ही टोल प्लाजा के पास पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए जा रहे हैं। यह निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की देखरेख में हो रहा है।"
टोल प्लाजा
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हाईवे पर समस्याओं की रिपोर्ट के लिए एप
उन्होंने आगे बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर किसी भी तरह की समस्या (जैसे शौचालय या अन्य सुविधाएं) की रिपोर्ट करने के लिए "राजमार्ग यात्रा" (Rajmarg Yatra) नाम का एक नया एप लॉन्च किया गया है।
इसके अलावा, NHAI ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने के लिए "NHAI One" एप में एक नया मॉड्यूल जोड़ा है। जिससे शौचालयों की साफ-सफाई की जांच की जाएगी। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शौचालय हमेशा साफ-सुथरे रहें। अभी तक 1,300 से ज्यादा शौचालय ब्लॉक इस एप पर पंजीकृत किए जा चुके हैं।
टोल एजेंसियों पर सफाई न रखने पर जुर्माना
टोल प्लाजा पर शौचालयों की सफाई और देखरेख की जिम्मेदारी टोल वसूलने वाली एजेंसियों की होती है। अगर वे सफाई के तय मानकों का पालन नहीं करती हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। सरकार के अनुसार, टोल एजेंसियों पर प्रति उल्लंघन 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। अब तक लगभग 46 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है।
toll plaza
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हर 40-60 किमी पर बनेगी सुविधाजनक स्थल
राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर हर 40-60 किलोमीटर की दूरी पर सुविधाजनक स्थल (Wayside Amenities) विकसित किए जाएंगे। इन जगहों पर सार्वजनिक शौचालय अनिवार्य रूप से बनाए जाएंगे।
अब तक देशभर में 455 सुविधाजनक स्थल स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 90 राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर पहले से ही काम कर रहे हैं।
इन राज्यों में सबसे ज्यादा सुविधाजनक स्थल
- राजस्थान: 58
- हरियाणा और मध्य प्रदेश: 48
- गुजरात: 45
- उत्तर प्रदेश: 44
- पंजाब: 35
- आंध्र प्रदेश: 34
National Highway
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शहरी और ग्रामीण इलाकों में भी स्वच्छता पर जोर
लोकसभा में दिए जवाब के मुताबिक, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने बताया कि स्वच्छता राज्य सरकारों की जिम्मेदारी होती है। शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता का काम नगर निकायों (ULBs) को सौंपा गया है, जिन्हें स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (SBM-U) के तहत केंद्र सरकार मदद देती है।
SBM-U के तहत 31 दिसंबर 2024 तक 67.57 लाख व्यक्तिगत शौचालय और 6.52 लाख सामुदायिक/सार्वजनिक शौचालय बनाए जा चुके हैं।
ग्रामीण इलाकों में भी स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए जल शक्ति मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को सार्वजनिक स्थानों, बाजारों, पर्यटन स्थलों, बस स्टैंड और हाईवे के किनारे सामुदायिक शौचालय बनाने के निर्देश दिए हैं। अब तक 2.51 लाख सामुदायिक शौचालय बनाए जा चुके हैं।
स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (SBM-G)
स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण मिशन 2 अक्तूबर 2014 को शुरू किया गया था, ताकि 2 अक्चूबर 2019 तक खुले में शौच की समस्या को खत्म किया जा सके। 2 अक्तूबर 2019 तक सभी गांवों ने खुद को खुले में शौच मुक्त (ODF) घोषित कर दिया था।
SBM-G का दूसरा चरण 2020-21 से 2025-26 तक चलेगा। जिसमें ODF की स्थिति बनाए रखने और ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन पर ध्यान दिया जाएगा।