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Vehicle Fitness Certificate: कमर्शियल वाहनों के लिए बड़ी राहत, वाहन फिटनेस सर्टिफिकेट फीस में 50% की कटौती

Thu, 23 Apr 2026 11:16 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ट्रकों, बसों और अन्य कमर्शियल वाहनों के मालिकों को बड़ी राहत देते हुए, सरकार ने एक अहम शुल्क में भारी कटौती की है। यह शुल्क वाहनों की फिटनेस साबित करने के लिए चुकाया जाता है।
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Commercial Transport - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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भारत सरकार ने ट्रक, बस और अन्य कमर्शियल वाहनों के मालिकों को बड़ी राहत देते हुए फिटनेस सर्टिफिकेट की फीस में 50 प्रतिशत की कटौती कर दी है।

अब वाहन मालिकों को पहले के मुकाबले आधी फीस ही देनी होगी, जिससे सीधे तौर पर खर्च कम होगा। 

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5,000 रुपये की फिटनेस सर्टिफिकेट फीस के बजाय, कमर्शियल वाहनों के मालिकों को अब 50 प्रतिशत कम यानी 2,500 रुपये देने होंगे।

यह फैसला किसने और कैसे लागू किया?

यह बदलाव Ministry of Road Transport and Highways (सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय) ने बुधवार को अधिसूचित किया।

इसे सेंट्रल मोटर व्हीकल्स (पांचवां संशोधन) नियम, 2026 के तहत लागू किया गया है और यह तुरंत प्रभाव से पूरे देश में लागू हो गया है।


फिटनेस सर्टिफिकेट क्यों जरूरी होता है?

कानून के अनुसार, हर कमर्शियल वाहन के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट जरूरी होता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि वाहन सड़क पर चलने के लिए सुरक्षित और योग्य है।

इस सर्टिफिकेट को समय-समय पर रिन्यू कराना भी अनिवार्य है, जिसके लिए वाहन की जांच और निर्धारित फीस का भुगतान करना पड़ता है।

इस बदलाव से कितनी बचत होगी?

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक आवेदन पर वाहन मालिकों को सीधे तौर पर 50 प्रतिशत की बचत होगी।

इसका मतलब है कि हर फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए अब कम खर्च करना पड़ेगा, जिससे छोटे और मध्यम ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स को राहत मिलेगी।


किन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा?

इस फैसले से ट्रक ऑपरेटर्स, बस ऑपरेटर्स, माल ढुलाई करने वाले और अन्य कमर्शियल वाहन मालिकों को सीधा लाभ मिलेगा।

खासकर छोटे ट्रांसपोर्टर्स, जो पहले से ही ईंधन, मेंटेनेंस, टैक्स और इंश्योरेंस जैसे खर्चों का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह बचत काफी महत्वपूर्ण हो सकती है।

फ्लीट ऑपरेटर्स के लिए, जिनके पास कई वाहन होते हैं, कुल मिलाकर बचत और भी ज्यादा होगी।

क्या यह नियम पूरे भारत में लागू होगा?

चूंकि यह केंद्र सरकार का नियम है, इसलिए यह देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा।

इसका मतलब है कि पूरे भारत में कमर्शियल वाहन मालिकों को इस राहत का लाभ मिलेगा।


अगर किसी ने पहले ज्यादा फीस दे दी हो तो क्या होगा?

अधिकारियों के अनुसार, जिन लोगों ने इस बदलाव से पहले ज्यादा फीस जमा की है, वे अपने क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) से संपर्क कर सकते हैं और संभावित रिफंड के बारे में जानकारी ले सकते हैं।

सड़क परिवहन का जीडीपी में योगदान

भारत में सड़क परिवहन एक प्रमुख आर्थिक चालक है, जो देश की जीडीपी में लगभग 3.5 प्रतिशत से 4.8 प्रतिशत का योगदान देता है। यह 85 प्रतिशत से अधिक यात्री यातायात और 70 प्रतिशत माल यातायात को संभालता है, और परिवहन क्षेत्र के भीतर कुल सकल मूल्य वर्धित (GVA) का 78 प्रतिशत हिस्सा इसी का है।

लाखों ट्रक और बस ऑपरेटर, जिनमें से कई छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय या व्यक्तिगत मालिक-ऑपरेटर हैं, हर दिन पूरे भारत में सामान और यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाते हैं।
 

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इस फैसले का व्यापक असर क्या होगा?

भारत में सड़क परिवहन अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है और यह यात्रियों व माल ढुलाई का प्रमुख माध्यम है।

नियामक शुल्क, हालांकि जरूरी होते हैं, लेकिन इनसे संचालन लागत बढ़ जाती है। इन शुल्कों में कोई भी कमी, भले ही वह कितनी भी मामूली क्यों न हो, परिवहन क्षेत्र के लिए व्यापार की कुल लागत को कम करती है। 

साथ ही, इसका माल ढुलाई की लागत पर और आखिरकार, उन कीमतों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है जो उपभोक्ता वस्तुओं के लिए चुकाते हैं।

ऐसे में फीस में कमी से ट्रांसपोर्ट सेक्टर की लागत घटेगी, जिसका असर आगे चलकर माल ढुलाई खर्च और उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाली कीमतों पर भी सकारात्मक पड़ सकता है।

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