अंतरराष्ट्रीय गोल्फर चिरंजीव मिल्खा, जिन्हें जीव मिल्खा सिंह के नाम से भी जाना जाता है, ने एक स्थानीय अदालत में मुकदमा दायर किया है। उन्होंने यह कदम उस नोटिस मिलने के बाद उठाया जिसमें कहा गया कि साल 2014 में बेची गई उनकी मर्सिडीज बेंज पर 63 चालान का भुगतान बकाया है। इस संबंध में अदालत 17 अक्तूबर को फैसला सुना सकती है। मिल्खा सिंह ने अनपी शिकायत में चालान संबंधी मामले में दिल्ली की एक कंपनी के एक निदेशक के खिलाफ धोखाधड़ी, छल और आपराधिक साजिश रचने के मामले में पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की है।
यह कार 2014 में रैली मोटर्स के कार डीलर तेजिंदर सिंह के जरिए दिल्ली के हौज खास स्थित वाइब्स हेल्थकेयर लिमिटेड के निदेशक नितिन जैन को 35 लाख रुपये में बेची गई थी। भारतीय गोल्फर के वकील टर्मिन्दर सिंह के अनुसार, मर्सिडीज की बिक्री और खरीद के लिए सभी जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी कर ली गई थी और जीव मिल्खा को नितिन जैन का एक हलफनामा भी दिया गया था। हालांकि, वाहन खरीदने के बावजूद, नए मालिक ने कार के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को ट्रांसफर नहीं किया।
चूंकि यह एक 10 साल पुरानी डीजल कार थी इस वजह से नई दिल्ली में इसका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ। इसलिए, सिंह को चालान के नोटिस मिलते रहते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक चालान की यह राशि 2015 से अब तक 83,000 रुपये तक हो गई है।
अदालत ने आवेदक की शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406 और 120 बी के तहत प्राथमिकी दर्ज करने के संबंध में अपने फैसले सुरक्षित रख लिए हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 17 अक्तूबर को होगी।
जीव मिल्खा सिंह ने कहा कि उन्होंने चंडीगढ़ में आरएलए (पंजीकरण और लाइसेंसिंग प्राधिकरण) को भी एक पत्र लिखा और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि खरीदार वाहन को अपने नाम पर ट्रांसफर नहीं करना चाहता था ताकि वह कोई भी अपराध कर और बच निकले।