इलेक्ट्रिक वाहनों में तेजी से बढ़ोतरी और सख्त नए नियमों के कारण सड़क परिवहन से होने वाला CO2 उत्सर्जन इस साल दुनिया भर में चरम पर पहुंच सकता है। मंगलवार को एक जर्मन थिंक टैंक ने यह खुलासा किया।
इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) (आईसीसीटी) ने अनुमान लगाया है कि 2025 में वाहनों से होने वाला उत्सर्जन लगभग नौ गीगाटन तक पहुंच जाएगा। जो कि पहले की भविष्यवाणी से एक चौथाई सदी पहले है।
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ICCT ने अगस्त 2024 तक पर्यावरण नियमों के आधार पर एक परिदृश्य में गणना की है कि 2050 में उत्सर्जन की मात्रा घटकर 7.1 गीगाटन रह जाएगी।
संगठन के पिछले पूर्वानुमान में, जिसमें 2021 में नियामक स्थितियों का उपयोग किया गया था, 2050 में सड़क परिवहन उत्सर्जन के चरम पर पहुंचने की भविष्यवाणी की गई थी।
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ICCT ने कहा कि यह तेजी से बदलाव प्रमुख बाजारों में नियमों में बदलाव के कारण हुआ है। जिसके तहत नई बिक्री में बैटरी से चलने वाली कारों सहित शून्य-उत्सर्जन वाहनों (ZEV) की अधिक हिस्सेदारी की आवश्यकता थी।
ICCT ने कहा कि सड़कों पर पहले से ही स्वच्छ वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी "ZEV की गिरती लागतों" के कारण हुई है।
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हालांकि, थिंक टैंक ने चेतावनी दी है कि सड़क परिवहन के लिए मौजूदा पर्यावरण मानकों के कमजोर होने से पीक में देरी हो सकती है।
उदाहरण के लिए, यूरोपीय संघ ने 2035 से नई पेट्रोल और डीजल कारों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने पर सहमति जताई है। लेकिन इस योजना की आलोचना बढ़ गई है।
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यूरोप के संघर्षरत ऑटोमोटिव उद्योग की ओर से इस लक्ष्य पर लगातार हमले हो रहे हैं। और यह ब्लॉक के कई दक्षिणपंथी राजनीतिक दलों के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
ICCT ने कहा कि वैश्विक वाहन गतिविधि में बढ़ोतरी या ZEV की बिक्री में मंदी भी पीक पर पहुंचने में देरी कर सकती है।
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थिंक टैंक द्वारा मॉडल किए गए दो परिदृश्यों के बीच अंतर पहले से ही महत्वपूर्ण था। लेकिन पेरिस जलवायु समझौते के साथ तालमेल बिठाने के लिए 2050 तक वार्षिक उत्सर्जन को 2.3 गीगाटन तक कम करना होगा।
जलवायु समझौते में वैश्विक तापमान को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे सीमित करने का लक्ष्य रखा गया है। और अगर संभव हो तो 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने का लक्ष्य रखा गया है।
ICCT ने अपने मॉडलिंग में सड़क परिवहन से जुड़े सभी उत्सर्जनों को शामिल किया, जिसमें वाहन उत्पादन और ईंधन उपयोग भी शामिल है।