दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को जेंसोल इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (Gensol Electric Vehicles) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड की सहायक कंपनी महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी को अपने कमर्शियल इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर e-ZEO की बिक्री से रोकने की मांग की गई थी।
कोर्ट ने रोक लगाने से किया इंकार
न्यायमूर्ति अमित बंसल ने कहा कि महिंद्रा और जेंसोल के वाहन अलग-अलग श्रेणियों में आते हैं और विभिन्न उपभोक्ता समूहों को लक्षित करते हैं। उन्होंने यह भी कहा किया कि जेंसोल का वाहन एक इलेक्ट्रिक पैसेजर व्हीकल है, जबकि महिंद्रा का वाहन कमर्शियल श्रेणी का इलेक्ट्रिक वाहन है। इसलिए, उनके आकार, डिजाइन, उपयोग और संभावित ग्राहकों में अंतर है।
Mahindra e Zeo
- फोटो : Mahindra
जेंसोल ने लॉन्च नहीं किया है वाहन
अदालत ने यह पाया कि जेंसोल ने अभी तक अपने 'EZIO' नामक वाहन को बाजार में लॉन्च नहीं किया है और न ही किसी अन्य वाहन को। इसलिए, यह नहीं कहा जा सकता कि वाहनों के संबंध में जेंसोल की बाजार में अपनी कोई पहचान बनाई है। दूसरी ओर, महिंद्रा कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहन सेगमेंट में एक लोकप्रिय नाम है और उसने अक्टूबर में अपने e-ZEO वाहन के आधिकारिक लॉन्च की घोषणा की थी।
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न्यायमूर्ति बंसल ने कहा कि महिंद्रा द्वारा 'ZEO/eZEO' चिह्न का उपयोग 'जीरो एमिशन ऑप्शन' (शून्य उत्सर्जन विकल्प) के संक्षिप्त रूप में किया गया था, जो वाहन के पर्यावरणीय लाभों को दर्शाने के लिए उपयोग किया गया है। यह मामला ऐसा नहीं है जहां महिंद्रा ने जेंसोल के चिह्न की नकल की हो ताकि उसकी प्रतिष्ठा का लाभ उठाया जा सके। इसके अलावा, जेंसोल का चिह्न 25 सितंबर 2024 को सार्वजनिक डोमेन में आया, जबकि महिंद्रा ने पहले ही अपने वाहन की लॉन्चिंग की घोषणा कर दी थी।
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अदालत ने यह भी कहा कि वर्तमान मामले में भ्रम की संभावना कम है, क्योंकि जेंसोल ने अभी तक अपने वाहन की बिक्री शुरू नहीं की है। सुविधा का संतुलन भी महिंद्रा के पक्ष में है, क्योंकि उसने पहले ही अपने उत्पाद को लॉन्च कर दिया है, जबकि जेंसोल अभी तक अपने उत्पाद को बाजार में लॉन्च नहीं कर पाया है।