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G20 Summit: पीएम मोदी ने ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस के लॉन्च का किया एलान, जानें इसके फायदे

Sat, 09 Sep 2023 07:04 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत ने शनिवार को ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस (वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन) शुरू करने का एलान किया और वैश्विक स्तर पर पेट्रोल के साथ इथेनॉल मिश्रण को 20 प्रतिशत तक ले जाने की अपील के साथ जी20 देशों से इस पहल में शामिल होने का आग्रह किया।
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Global Biofuel Alliance - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत ने शनिवार को ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस (वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन) शुरू करने का एलान किया और वैश्विक स्तर पर पेट्रोल के साथ इथेनॉल मिश्रण को 20 प्रतिशत तक ले जाने की अपील के साथ जी20 देशों से इस पहल में शामिल होने का आग्रह किया।
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'वन अर्थ' पर जी20 शिखर सम्मेलन सत्र में बोलते हुए, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 'पर्यावरण और जलवायु अवलोकन के लिए जी20 सैटेलाइट मिशन' शुरू करने का भी प्रस्ताव रखा और नेताओं से 'ग्रीन क्रेडिट पहल' पर काम शुरू करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, "आज समय की मांग है कि सभी देश ईंधन मिश्रण के क्षेत्र में मिलकर काम करें। हमारा प्रस्ताव पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को 20 प्रतिशत तक ले जाने के लिए वैश्विक स्तर पर पहल करने का है।"
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मोदी ने सत्र में कहा, "या वैकल्पिक रूप से, हम व्यापक वैश्विक भलाई के लिए एक और मिश्रण विकसित करने पर काम कर सकते हैं, जो स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ जलवायु सुरक्षा में भी योगदान देता है।" इस सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और ब्रिटेन के प्रधान मंत्री ऋषि सुनक सहित अन्य लोगों ने भाग लिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती को देखते हुए ऊर्जा परिवर्तन 21वीं सदी की दुनिया की एक महत्वपूर्ण जरूरत है।

उन्होंने कहा कि समावेशी ऊर्जा परिवर्तन के लिए खरबों डॉलर की आवश्यकता है और विकसित देश इसमें बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा, "भारत के साथ-साथ ग्लोबल साउथ के सभी देश इस बात से खुश हैं कि विकसित देशों ने इस साल 2023 में सकारात्मक पहल की है। विकसित देशों ने पहली बार क्लाइमेट फाइनेंस (जलवायु वित्त) के लिए 100 बिलियन अमरीकी डॉलर की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने की इच्छा व्यक्त की है।" 

2009 में कोपेनहेगन संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता में, विकसित देशों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने में विकासशील देशों का समर्थन करने के लिए 2020 तक प्रति वर्ष 100 बिलियन अमरीकी डॉलर प्रदान करने की प्रतिबद्धता जताई थी।

हालांकि, धनी राष्ट्र इस प्रतिबद्धता को पूरा करने में बार-बार नाकाम रहे।
 

पीएम मोदी की दूरदर्शिता

PM Modi - फोटो : Twitter
ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस, जिसे दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता जी20 की अध्यक्षता के दौरान आगे बढ़ाना चाहता है, सभी की पहुंच के भीतर स्वच्छ और सस्ती सौर ऊर्जा लाने के लिए 2015 में नई दिल्ली और पेरिस द्वारा संचालित अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) को प्रतिबिंबित करता है।

इस महीने की शुरुआत में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने एक विशेष साक्षात्कार में समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के समूह के सदस्यों के बीच जैव ईंधन पर वैश्विक गठबंधन के लिए भारत का प्रस्ताव ग्लोबल एनर्जी ट्रांजिशन (वैश्विक ऊर्जा संक्रमण) के समर्थन में स्थायी जैव ईंधन तैनाती में तेजी लाने में मदद करेगा।

उन्होंने कहा था, "इस तरह के गठबंधनों का मकसद विकासशील देशों के लिए अपने ऊर्जा परिवर्तन को आगे बढ़ाने के लिए विकल्प तैयार करना है।"

मोदी ने कहा था, "जैव ईंधन एक सर्कुलर इकॉनमी (चक्रीय अर्थव्यवस्था) के नजरिए से भी महत्वपूर्ण है। बाजार, व्यापार, टेक्नोलॉजी और नीति अंतरराष्ट्रीय सहयोग के सभी पहलू ऐसे अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण हैं।"
 

क्या है बायोफ्यूल

Biofuel - फोटो : For Reference Only
बायोफ्यूल (जैव ईंधन) ऊर्जा का एक रिन्युएबल (नवीकरणीय) स्रोत है जो बायोमास से हासिल होता है। भारत, जो अपनी 85 प्रतिशत से ज्यादा कच्चे तेल की जरूरतों का आयात करता है, धीरे-धीरे फसल के ठूंठ, पौधों के अपशिष्ट और नगरपालिका ठोस अपशिष्ट जैसी वस्तुओं से ईंधन का उत्पादन करने की क्षमता का निर्माण कर रहा है।

जबकि भारत 2025 तक गन्ने और कृषि अपशिष्ट से निकाले गए इथेनॉल के मिश्रण को पेट्रोल के साथ दोगुना करके 20 प्रतिशत करने की योजना पर है, यह दर्जनों कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट भी लगा रहा है।
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ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस के फायदे

G20 Summit - फोटो : Twitter
वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन का मकसद परिवहन सहित सभी क्षेत्रों में सहयोग को सुविधाजनक बनाना और टिकाऊ जैव ईंधन के इस्तेमाल को तेज करना है।

इसका ध्यान मुख्य रूप से बाजारों को मजबूत करने, वैश्विक जैव ईंधन व्यापार को सुविधाजनक बनाने, ठोस नीति सबक-साझाकरण विकसित करने और दुनिया भर में राष्ट्रीय जैव ईंधन कार्यक्रमों के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करने पर है।

इस तरह की पहल का उद्देश्य भारत को वैकल्पिक ईंधन को अपनाने में मदद करना और उसके आयात बिल में कटौती करना है, क्योंकि वह 2070 तक अपने शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करना चाहता है।

दूसरी ओर, आईएसए का लक्ष्य सौर ऊर्जा की व्यापक तैनाती के लिए 2030 तक आवश्यक 1,000 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश जुटाना है।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि 2050 तक दुनिया की ऊर्जा प्रणाली को शुद्ध शून्य उत्सर्जन की दिशा में लाने के लिए वैश्विक टिकाऊ जैव ईंधन उत्पादन को 2030 तक तीन गुना करने की जरूरत होगी।

लिक्विड बायोफ्यूल (तरल जैव ईंधन) ने 2022 में कुल परिवहन ऊर्जा आपूर्ति का 4 प्रतिशत से ज्यादा प्रदान किया।
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