प्रदूषण के साथ ही सुरक्षा की चिंता
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस सर्वे में 10,000 कार मालिकों से बातचीत की गई। नतीजे बताते हैं कि 54 प्रतिशत लोग यह मानते हैं कि 15 साल पुरानी गाड़ियां चलाना खतरनाक है। सिर्फ इसलिए नहीं कि वे प्रदूषण फैलाती हैं, बल्कि इसलिए कि उनमें एयरबैग, ABS ब्रेक और ADAS जैसी जरूरी सेफ्टी टेक्नोलॉजी नहीं होती। वहीं, 46 प्रतिशत लोग अब भी पुरानी गाड़ियों से निकलने वाले धुएं को बड़ा खतरा मानते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लोगों के सोच में यह बदलाव आ रहा है कि पुरानी गाड़ियां सिर्फ पर्यावरण नहीं, इंसानों के लिए भी जोखिम हैं।
यह भी पढ़ें - India-UK FTA: ब्रिटिश लग्जरी कारें अब भारत में होंगी सस्ती, जानें भारत-यूके एफटीए से क्या-क्या बदलेगा
सड़क पर जोखिम बढ़ा रहे हैं पुराने वाहन
सर्वे में ऐसे कई अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों का भी जिक्र किया गया है जो बताते हैं कि पुरानी गाड़ियां दुर्घटना और मौतों के मामले में ज्यादा खतरनाक होती हैं। उदाहरण के लिए:
- 15 साल से ज्यादा पुरानी गाड़ी चलाने वाले युवाओं की क्रैश में जान जाने का खतरा 31 प्रतिशत ज्यादा होता है।
- 6 से 15 साल पुरानी गाड़ियों में यह खतरा 19 प्रतिशत ज्यादा होता है।
- कुल मिलाकर, पुरानी गाड़ियां 30 प्रतिशत मामलों में हादसों में शामिल होती हैं, जबकि नई गाड़ियां 25 प्रतिशत।
- इन पुरानी गाड़ियों में अक्सर ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग, ब्लाइंड स्पॉट मॉनिटरिंग, और लेन असिस्ट जैसे फीचर नहीं होते। ये फीचर्स अब दुर्घटनाओं से बचने में काफी मददगार साबित होते हैं।
यह भी पढ़ें - Zelio Gracy+: जेलियो ग्रेसी+ इलेक्ट्रिक स्कूटर का नया फेसलिफ्ट लॉन्च, कई बैटरी ऑप्शन के साथ आया
बैन लगनी चाहिए या नहीं
दिल्ली में मौजूदा नियमों के तहत 15 साल से पुरानी पेट्रोल गाड़ियों और 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियों को फ्यूल सप्लाई नहीं दी जाती। हालांकि, इस नियम पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक इस सर्वे में इस नियम को लेकर जनता की राय बटी हुई है।
50 प्रतिशत लोग इसे पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए जरूरी मानते हैं। जबकि बाकी 50 प्रतिशत का कहना है कि यह नियम बहुत कठोर है और असली समस्या यानी सुरक्षा को नजरअंदाज करता है।
यह भी पढ़ें - Rain Driving Tips: बारिश में गाड़ी चला रहे हैं? ये 10 आसान टिप्स आपकी और कार की सुरक्षा के लिए हैं बेहद जरूरी
सिर्फ बैन समाधान नहीं, बेहतर विकल्पों की मांग
लोगों ने सर्वे में यह भी सुझाव दिए कि सीधे बैन लगाने के बजाय कुछ संतुलित और व्यावहारिक उपाय अपनाए जा सकते हैं। जैसे -
- 29% लोग हर साल पुरानी गाड़ियों की सेफ्टी चेकिंग अनिवार्य करने के पक्ष में हैं।
- 28% चाहते हैं कि PUCC (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट) के नियम और कड़े हों।
- 27% ने कहा कि अगर पब्लिक ट्रांसपोर्ट बेहतर हो जाए, तो लोग खुद ही प्राइवेट गाड़ियां कम इस्तेमाल करेंगे।
यह भी पढ़ें - Drunk Driving: इस भारतीय शहर में 2025 में अब तक नशे में गाड़ी चलाने के लिए हर दिन 81 से ज्यादा चालान काटे
प्रदूषण के लिए अब गाड़ियों को नहीं मानते सबसे बड़ा दोषी
सर्वे में एक और दिलचस्प बात सामने आई है। अब लोग प्रदूषण के लिए सिर्फ गाड़ियों को जिम्मेदार नहीं मानते। सिर्फ 25 प्रतिशत लोगों ने वाहनों को दिल्ली की जहरीली हवा का मुख्य कारण माना। जबकि:
- 33% लोगों ने अवैध उद्योगों को दोषी ठहराया
- 26% ने पराली जलाने को मुख्य कारण बताया
- और 15% ने अधिकृत निर्माण कार्यों को जिम्मेदार माना।
यह भी पढ़ें - Renault Triber Facelift: 2025 रेनो ट्राइबर फेसलिफ्ट एमपीवी भारत में लॉन्च, जानें कीमत और क्या हुए बदलाव