रुफ-टॉप रोबोटिक चार्जिंग सिस्टम
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इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ रही है, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर हर देश में समान गति से नहीं बढ़ पाया। इसी चुनौती को देखते हुए चीन में ऐसा रोबोटिक सिस्टम विकसित हुआ है, जो पार्किंग में खड़ी कार तक खुद पहुंचकर उसे चार्ज करता है। इस तकनीक का नाम रुफ-टॉप रोबोटिक चार्जिंग सिस्टम है। ये समाधान खासतौर पर उन जगहों के लिए डिजाइन किया गया है जहां गाड़ियां कई घंटों तक खड़ी रहती हैं जैसे कॉर्पोरेट ऑफिस, शॉपिंग मॉल और रिहायशी सोसायटी।
कैसे काम करता है यह रोबोटिक चार्जिंग सिस्टम?
- पार्किंग गैरेज की छत पर विशेष रेल ट्रैक लगाए जाते हैं।
- इन ट्रैक्स पर एक मोबाइल रोबोटिक चार्जर चलता है।
- ड्राइवर क्यूआर कोड स्कैन करता है या मोबाइल एप से रिक्वेस्ट भेजता है।
- रोबोट कैमरा और सेंसर की मदद से गाड़ी का चार्जिंग पोर्ट पहचानता है।
- ऑटोमैटिक आर्म प्लग कनेक्ट करता है और चार्जिंग शुरू हो जाती है।
हालांकि ये पारंपरिक डीसी फास्ट चार्जर जितना तेज नहीं है, लेकिन 6–8 घंटे पार्क रहने वाली गाड़ियों के लिए पर्याप्त है।
महंगे चार्जिंग स्टेशनों से मिलेगा छुटकारा
इस तकनी क का सबसे बड़ा फायदा इसकी किफायती लागत है। आम तौर पर हर पार्किंग स्पॉट पर एक अलग चार्जर लगाना बहुत महंगा पड़ता है। लेकिन यहां एक अकेला रोबोट 8 या उससे ज्यादा पार्किंग स्पेस को संभाल सकता है। साथ ही जमीन पर बड़े हार्डवेयर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे पार्किंग में जगह की बचत होती है।
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चीन बनाम अमेरिका: चार्जिंग की रेस हुई तेज
चीन की लि ऑटो और वेव चार्जिंग जैसी कंपनियां इस तकनीक में सबसे आगे मानी जाती हैं और बीजिंग जैसे शहरों में एक हजार से ज्यादा ऐसे रोबोट लगाने की तैयारी है। वहीं, अमेरिका भी पीछे नहीं है। 2025 में वेस्टफेलिया टेक्नोलॉजीज ने अपना वीप्लग सिस्टम पेश किया है, जो रोबोटिक आर्म तकनीक का इस्तेमाल करता है। वहीं, न्यूयॉर्क में भी सड़कों पर जगह बचाने के लिए जमीन से ऊपर चार्जिंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं।
क्या भारत में है इसकी जरूरत?
भारत में फिलहाल ईवी चार्जिंग स्टेशंस की कमी एक बड़ा मुद्दा है। ऐसे में एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ये ओवरहेड रोबोटिक सिस्टम भीड़भाड़ वाले शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु की पार्किंग के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं, जहां जगह की भारी कमी है। इससे सार्वजनिक पार्किंग को बिना किसी तोड़-फोड़ के स्मार्ट चार्जिंग हब में बदला जा सकता है।