क्या हैं फ्लश डोर हैंडल्स
फ्लश डोर हैंडल्स दरवाजे की सतह के अंदर फिट होते हैं, इसलिए बाहर से दिखाई नहीं देते।
इनका उद्देश्य है:
- कार को मॉडर्न और प्रीमियम लुक देना
- एरोडायनामिक्स सुधारना
- बॉडी लाइन्स को क्लीन रखना
इसे शुरू में इलेक्ट्रिक कारों के लिए अपनाया गया था। लेकिन अब ये पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों में भी आ रहा है। जैसे टाटा अल्ट्रोज और महिंद्रा XUV700 एसयूवी।
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डिजाइन जितना स्मार्ट, सेफ्टी उतनी मुश्किल
फ्लश डोर हैंडल देखने में आकर्षक लगते हैं, लेकिन इनके साथ कुछ गंभीर सेफ्टी रिस्क भी जुड़े हैं:
1. इलेक्ट्रॉनिक फेल्योर यानी दरवाजा नहीं खुलेगा
ये हैंडल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से चलते हैं। अगर कार की बैटरी खराब हो जाए या सिस्टम फेल हो जाए, तो हैंडल बाहर नहीं आएंगे।
अंदर बैठे लोग फंस सकते हैं
रेस्क्यू टीम को दरवाजा खोलने में दिक्कत होगी
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2. इमरजेंसी में इस्तेमाल करना मुश्किल
कंपनियां बैकअप मैनुअल रिलीज देती हैं, लेकिन:
- वो छिपी होती हैं
- एक्सीडेंट या पैनिक में उन्हें ढूंढना बहुत मुश्किल होता है
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4. एक्सीडेंट और पानी में फेल होने का खतरा
अगर साइड इम्पैक्ट या भयंकर बारिश के दौरान सिस्टम खराब हो जाए:
- हैंडल काम करना बंद कर सकते हैं
- पानी से शॉर्ट सर्किट हो सकता है
- दरवाजा लॉक हो सकता है
फ्लश डोर हैंडल्स कारों को मॉडर्न, स्टाइलिश और एरोडायनामिक दिखाते हैं, लेकिन इनके साथ इमरजेंसी सुरक्षा एक बड़ी चिंता है। अगर ऑटोमोकर इन्हें अपनाते रहेंगे, तो बेहतर बैकअप सिस्टम, मैनुअल मैकेनिज्म और रेगुलेशन की जरूरत होगी ताकि डिजाइन सेफ्टी पर भारी न पड़े।
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