850 किलोमीटर की यात्रा, 45 घंटे में सफर
यह ट्रेन मारुति सुजुकी के इन-प्लांट "गति शक्ति टर्मिनल" से रवाना हुई। लगभग 850 किलोमीटर का सफर यह ट्रेन करीब 45 घंटे में पूरा करेगी। इस रेक में ब्रेजा, डिजायर, वैगनआर और एस-प्रेसो जैसे पॉपुलर मॉडल शामिल थे।
यात्रा के दौरान यह ट्रेन चिनाब रेल ब्रिज से गुजरेगी, जो दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस सेवा से घाटी जाने वाले सड़कों पर ट्रैफिक कम होगा और सामान ले जाने का एक सुरक्षित व भरोसेमंद विकल्प मिलेगा।
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Automobile Freight Train Operation
- फोटो : Maruti Suzuki
पहले भी दर्ज हुए अहम पड़ाव
अनंतनाग पहुंचने वाली यह पहली ऑटोमोबाइल रेक है। इससे पहले 9 अगस्त को पंजाब के रूपनगर से सीमेंट लेकर आई मालगाड़ी अनंतनाग गुड्स शेड पर पहुंची थी। इसके बाद से घाटी में कई ट्रेनें सेना के विंटर स्टॉक्स, फलों और अन्य सामान के साथ पहुंच चुकी हैं।
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यह सब उदयपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (USBRL) प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका मकसद जम्मू-कश्मीर को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से पूरी तरह जोड़ना है। अधिकारियों का कहना है कि इससे लॉजिस्टिक्स में सुधार हुआ है और सड़क परिवहन पर दबाव कम हुआ है। जो अक्सर मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों से प्रभावित होता है।
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मारुति का रेल पर जोर
मारुति सुजुकी के लिए यह कदम उसकी लगातार बढ़ती रेल-लॉजिस्टिक्स रणनीति का हिस्सा है। कंपनी ने मानेसर में देश का सबसे बड़ा इन-प्लांट रेलवे साइडिंग बनाया है, जो कि 46 एकड़ में फैला हुआ है। यहां से गाड़ियां सीधे असेंबली लाइन से ट्रेन पर लोड की जाती हैं, जिससे हैंडलिंग की दिक्कत और ट्रांसपोर्ट के दौरान डैमेज का जोखिम खत्म हो जाता है।
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साल 2024-25 में मारुति ने रेल के जरिए 5.18 लाख से ज्यादा गाड़ियां भेजीं, जो उसके कुल डिस्पैच का लगभग चौथाई हिस्सा है। कंपनी का कहना है कि रेल पर शिफ्ट होने से हर साल करीब 65,000 ट्रक ट्रिप्स कम हो जाते हैं और लगभग 60 मिलियन लीटर डीजल की खपत बचती है। यह लागत में बचत के अलावा वायु प्रदूषण को कम करने की दिशा में भी काफी अहम माना जा करा है।
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