फिक्की ने आधिकारिक तौर पर भारी उद्योग मंत्रालय को एक प्रस्ताव पेश किया है। जिसमें अगले पांच वर्षों के लिए हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों (FAME) योजना को तेजी से अपनाने और मैन्युफेक्चरिंग को जारी रखने का आग्रह किया गया है, जिसकी तीन साल पर समीक्षा की जाए।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) (फिक्की) ने आधिकारिक तौर पर भारी उद्योग मंत्रालय को एक प्रस्ताव पेश किया है। जिसमें अगले पांच वर्षों के लिए हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों (FAME) योजना को तेजी से अपनाने और मैन्युफेक्चरिंग को जारी रखने का आग्रह किया गया है, जिसकी तीन साल पर समीक्षा की जाए। पीटीआई की एक रिपोर्ट में यह जानकारी मिली है। मौजूदा FAME II योजना मार्च 2024 में खत्म होने वाली है।
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फिक्की ने अपफ्रंट प्राइस इंसेंटिव को अचानक वापस लेने या बंद करने के संभावित परिणामों पर रोशनी डाली। जिसमें कहा गया कि इस तरह के कार्यों से इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की कीमतों में 25 प्रतिशत तक की उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। जिससे ईवी अपनाने की रफ्तार को काफी हद तक बाधित कर सकता है। जिससे क्षेत्र में निवेश पर असर पड़ेगा और अब तक हासिल की गई प्रगति खतरे में पड़ जाएगी।
उद्योग निकाय ने कनाडा, अमेरिका और कोरिया जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ईवी के लिए परजेस इंसेंटिव (खरीद प्रोत्साहन) के मौजूदा प्रावधान पर जोर दिया। फिक्की ने तर्क दिया कि भारत को पीछे नहीं रहना चाहिए और वैश्विक ईवी ट्रेंड में शामिल होने का मौका चूकना नहीं चाहिए।
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Electric Scooter Plant
- फोटो : Simple Energy
इस समय, भारत में ईवी की पहुंच सिर्फ 5 प्रतिशत है। फिक्की ने 2030 तक सरकार के 30 प्रतिशत ईवी एंट्री के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल करने के लिए FAME योजना को जारी रखने के महत्व पर जोर दिया। इसमें कहा गया है कि यह 'पंचामृत' और नेट-जीरो लक्ष्यों सहित भारत के जलवायु कार्रवाई लक्ष्यों का समर्थन करने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
विभिन्न हितधारकों सहित ईवी क्षेत्र के भीतर विविध सदस्यता आधार से इनपुट के आधार पर, फिक्की ईवी समिति ने अनुमान लगाया कि अगले पांच वर्षों में सुझाए गए मांग प्रोत्साहन प्रदान करने से विभिन्न सेगमेंट में 30.5 मिलियन इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की सुविधा मिल सकती है। यह, बदले में, भारत के परिवहन क्षेत्र के लिए 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिफिकेशन लक्ष्य को हासिल करने में योगदान देगा।
फिक्की ने अपने कड़े स्थानीयकरण मानदंडों के जरिए फेम योजना के 'मेक इन इंडिया' पर जोर देने के महत्व को रेखांकित किया। इसने FAME को अचानक बंद करने के प्रति आगाह किया। क्योंकि यह न सिर्फ मांग बढ़ोतरी को उलट सकता है बल्कि ईवी क्षेत्र में निवेश और व्यापक स्थानीय उत्पादन उद्देश्य को भी प्रभावित कर सकता है।
इसके अलावा, फिक्की ने जोर देकर कहा कि भारत सरकार द्वारा शुरू की गई प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना की कामयाबी ईवी की निरंतर मांग पर निर्भर करती है।
आगे देखते हुए, फिक्की ने आशा जताई है कि, अगले 3-5 वर्षों में, बैटरी की कीमतों में कटौती और ईवी कंपोनेंट पर स्केलिंग प्रभाव कम होने और आखिरकार मांग प्रोत्साहन को बंद करने का रास्ता खोल सकता है।