फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

नकली हेलमेट सिर और आंखों के लिए हो सकता है खतरनाक, खरीदते समय ध्यान रखें ये बातें

बनी कालरा, अमर उजाला Published by: Bani Kalra Updated Sun, 14 Jul 2019 12:08 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
Non ISI mark Helmet - फोटो : Social

हमारे देश में ज्यादातर लोग हेलमेट सिर्फ इसलिये खरीदते हैं, ताकि उनका चालान न कट जाये। बहुत कम लोग हैं, जो सुरक्षा के लिये अच्छी क्वालिटी का हेलमेट खरीदना पसंद करते हैं। देश में नकली हेलमेट की बिक्री लगातार बढ़ रही है। सड़क किनारे और लोकल दुकानों पर 100 रुपये से लेकर 300 रुपये में नकली हेलमेट आसानी से मिल रहे हैं। वहीं कई बार तो इन हेलमेट पर आईएसआई का नकली स्टिकर लगा कर भी बेचा जाता है। यही कारण है कि देश में नकली हेलमेट की वजह से सड़क दुर्घटनाओं में सैकड़ों लोग अपनी जान गंवाते हैं। वहीं नकली हेलमेट आपकी आंखों के लिए भी बेहद खतरनाक हैं।

नकली हेलमेट आपकी आंखों के लिए है बेहद खतरनाक

नकली हेलमेट बनाने में घटिया और हल्की क्वालिटी का सामान इस्तेमाल किया जाता है, वहीं इसमें लगा वाइजर (आगे का पारदर्शी हिस्सा) भी UV सुरक्षित नहीं होता, जिसकी वजह से तेज धूप में आंखों की सुरक्षा नहीं हो पाती। इतना ही नहीं रात में सामने से आ रहे वाहनों की हाई बीम तेज रोशनी भी सीधा आंखों पर असर डालती है, जिसकी वजह से आंखों की रोशनी कमजोर पड़ जाती है। जबकि अच्छी गुणवत्ता के ओरिजिनल हेलमेट में UV प्रोटेक्शन वाला वाइजर लगा होता है, जो धूप से आपकी आंखों को सुरक्षित  रखता है, साथ ही आपके चेहरे को भी धूप से बचाता है।

ISI मार्क वाला हेलमेट कितना सुरक्षित

देश की प्रसिद्ध हेलमेट निर्माता कंपनी स्टीलबर्ड हेलमेट के एमडी राजीव कपूर का कहना है कि हमेशा ISI मार्क वाला ही हेलमेट खरीदना और पहनना चाहिए। असली ISI मार्क वाला हेलमेट 300 से 400 रुपये में बन ही नहीं सकता, लेकिन लोकल मार्किट में ISI मार्क वाला सब स्टैंडर्ड हेलमेट मिल रहा है। यह हेलमेट आपको चालान से जरूर बचा सकता है, लेकिन दुर्घटना होने पर आपकी जान नहीं बचा सकता। उनका कहना है कि नकली हेलमेट बेचने का मतलब नकली दवाई बेचने जैसा है। इसलिए हमेशा ओरिजिनल हेलमेट ही खरीदें और पहनें। असली हेलमेट में क्वालिटी और सेफ्टी स्टैंडर्ड्स का पूरा ध्यान रखा जाता है। क्योंकि एक असली हेलमेट कई सेफ्टी टेस्ट से होकर गुजरता है। आंकड़ों के मुताबिक सड़क हादसों में हर साल दस लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है, क्योंकि हमारे देश के कई राज्यों और जिलों में यातायात पुलिस की सीमित संख्या है। यदि हम बीमा कंपनियों के आंकड़ों की मानें, तो इन हादसों में मरने वालों की संख्या कहीं ज्यादा है। 

नकली हेलमेट आपको चालान से जरूर बचा सकता है, लेकिन दुर्घटना होने पर आपकी जान नहीं बचा सकता।  नकली हेलमेट बेचना मतलब नकली दवाई बेचने के जैसा है। - राजीव कपूर, एमडी, स्टीलबर्ड


ऐसे करें नकली हेलमेट की पहचान

स्टीलबर्ड हेलमेट के एमडी, राजीव कपूर  के मुताबिक, आज देश में करीब 80 फीसदी हेलमेट नकली बिक रहे हैं। लेकिन इनकी पहचान करना बेहद आसान है, अगर कोई आपको 450 रुपये से कम में हेलमेट बेच रहा है, तो समझ जाएं कि आप एक नकली हेलमेट खरीद रहे हैं। क्योंकि कोई भी ISI मार्क वाला हेलमेट इतनी कम कीमत में नहीं बन सकता। सरकार के सुरक्षा मानकों  के मुताबिक एक ISI मार्क वाले हेलमेट को बनाने में ही न्यूनतम लागत 450 रुपए आती है।

भारत में हर साल 10 करोड़ ISI हेलमेट की मांग

मौजूदा समय में पूरे देश में हेलमेट पहनना अनिवार्य है, लेकिन यह कानून केवल दिल्ली, चंडीगढ़ और जयपुर में ही प्रभावी तौर पर लागू है। सरकार मोटर व्हीकल एक्ट के नए संशोधन में जल्द ही हेलमेट को अनिवार्य करेगी और कानून को पूरे देश में लागू करेगी, इससे बाजार में मांग बढ़ेगी।

अवैध हेलमेट की फैक्ट्रियां

एक हेलमेट विक्रेता के मुताबिक दिल्ली में कई ऐसे इलाके हैं जहां घरों में अवैध हेलमेट की फैक्ट्रियां चलाई जा रही हैं और नकली हेलमेट बनाए जा रहे हैं। इन पर लगाम कसना बेहद जरूरी है। साथ ही, जो लोग नकली हेलमेट बेच रहे हैं उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिये। ताकि लोग असली हेलमेट खरीद सकें।

आखिर क्यों खरीदे जाते हैं नकली हेलमेट

सोचने वाली बात यह है कि बाजार में नकली हेलमेट इतने क्यों बिक रहे हैं? क्या लोगों को अपनी जान की परवाह नहीं है? हमनें कुछ लोगों से बात की तो पता चला कि सिर्फ चालान से बचने के लिये ही लोग सस्ते हेलमेट खरीदते हैं। क्योंकि लोगों को कम कीमत में नकली हेलमेट मिल जाते हैं।

हेलमेट से इतनी चिढ़ क्यों है?

अकसर देखने में आता है कि लोग हेलमेट को हाथ में फंसा कर ड्राइव करते हैं। लोगों का कहना है कि हेलमेट में घुटन होती है और तेज पसीना आता है। वहीं गर्मियों में पसीने तथा फोम की सिंथेटिक रगड़ के चलते अकसर सिर में खुजली और बाल झड़ने जैसी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ता है। जबकि महिलायें हेलमेट पहनना इसलिए पसंद नहीं करती क्योंकि इससे उनका हेयरस्टाइल बिगड़ने का डर लगा रहता है। इस बारे में हेलमेट निर्माता कंपनियों का कहना है कि वे अब कम वजन वाले हेलमेट बाजार में लॉन्च कर रही हैं। साथ ही, हेलमेट में हवा अन्दर और बाहर जा सकने के लिए आगे, पीछे और ऊपर की तरफ एयरवेंट लगाए जा रहे हैं।  

आ रहे हैं नई टेक्नोलॉजी वाले हेलमेट

हेलमेट इंडस्ट्री लगातार युवा ग्राहकों की जरूरत को देखते हुए नए-नए हेलमेट बना रही है, जो वजन में हल्के और बढ़िया ग्राफिक्स वाले होते हैं। इतना ही नहीं आजकल हेलमेट में भी जबरदस्त टेक्नोलॉजी देखने को मिल रही है। मार्केट में एंटी बैक्टीरियल हेलमेट, हैंड्सफ्री हेलमेट, कार्बन फाइबर हेलमेट और वेंटीलेशन हेलमेट आ रहे हैं। इसके आलावा फोटो क्रोमेटिक वाइजर वाले हेलमेट भी हाल ही में लॉन्च हुए हैं। ये वाइजर दिन में काले और रात में सामान्य हो जाते हैं, जो आपकी आंखों के साथ स्किन के लिये भी सुरक्षित होते हैं। इस समय मार्किट में स्टीलबर्ड, स्टड्स, LS एरोस्टार, Wrangler जैसे कई अच्छे हेलमेट ब्रांड्स मौजूद हैं।

खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

मार्किट में हर रंग और डिजाइन के हेलमेट मौजूद हैं, ऐसे में आप अपनी जरूरत के मुताबिक हेलमेट चुनें। हेलमेट का वाइजर कभी गहरे रंग का नहीं होना चाहिये क्योंकि इससे रात में दिक्कत होती है। हेलमेट खरीदते समय ध्यान रखें, अगर हेलमेट कहीं से टूटा हुआ हो, तो लेने से बचें। अच्छी क्वालिटी के वाइजर वाले हेलमेट खरीदें, ताकि आंखों पर भारीपन न महसूस हो। साथ ही, उसी हेलमेट को प्राथमिकता दें, जिसके अंदर की फोम की लाइनिंग आसानी से बाहर निकल जाती हो, ताकि इन्फेक्शन से बचने के लिये आप उसे हफ्ते में एक बार धोकर दोबारा इस्तेमाल कर सकें।

और पढ़ें...
Add as a preferred
source on google
विज्ञापन
विज्ञापन
Next