रोल्स-रॉयस ने 2023 के अंत में अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार स्पेक्टर लॉन्च की थी। जिसमें करीब 420,000 डॉलर यानी लगभग 3.5 करोड़ रुपये कीमत वाली इस ईवी को शुरुआत में अरबपतियों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला, लेकिन 2025 के पहले तीन तिमाहियों में स्पेक्टर की डिलीवरी में 45 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जबकि इसी दौरान कुल रोल्स-रॉयस बिक्री में 3.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
रोल्स-रॉयस के सीईओ क्रिस-ब्राउनरिज के अनुसार, कंपनी भविष्य में और इलेक्ट्रिक मॉडल्स लॉन्च करने की तैयारी में है, लेकिन वे पहले रोल्स रॉयस होंगे फिर ईवी। उन्होंने साफ कहा कि वी12 इंजन के लिए अब भी मजबूत मांग बनी हुई है और जहां ग्राहक इसे चाहेंगे, वहां कंपनी आईसीई मॉडल्स बनाती रहेगी।
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कस्टमाइजेशन पर बढ़ा जोर
ईवी मांग में कमी के बीच रोल्स-रॉयस अब बेस्पोक कारों को बढ़ावा दे रहा है। इसके लिए कंपनी दुनिया भर में अपने प्राइवेट ऑफिस नेटवर्क का विस्तार कर रही है, जहां ग्राहकों से एक-से-एक मुलाकात कर पूरी तरह कस्टमाइज्ड कारें डिजाइन की जाती हैं। ये रणनीति रोल्स-रॉयस को एक कार निर्माता ज्यादा लक्जरी लाइफस्टाइल ब्रांड के रूप में मजबूत करती है।
क्या वैश्विक स्तर पर भी बदलाव होगा?
सिर्फ यही नहीं, बल्कि पूरे यूरोप में ऑटोमेकर्स अपनी इलेक्ट्रिक महत्वाकांक्षाओं से पीछे हटते दिख रहे हैं। यहां 2025 तक आईसीई कारों पर प्रतिबंध को प्रभावी रूप से कमजाेर कर दिया है। अमेरिका में भी नई सरकार के साथ ईवी नीति में यू-टर्न देखने को मिला है। जिसका सीधा असर अल्ट्रा-लग्जरी ईवी की मांग पर पड़ा है।
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क्या पहले भी ऐसा कभी हुआ है?
सीईओ ब्राउनरिज के अनुसार, किसी भी नए कॉन्सेप्ट की शुरुआत में ज्यादा मांग होती है। जो बाद में स्थिर हो जाती है। ये पैटर्न पहले भी कई मॉडल्स के साथ देखा जा चुका है।